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पनामा से थरूर का आतंकवाद पर प्रहार: "चीखें सुनी हैं, अब खामोश नहीं रहेंगे"

थरूर ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उस बर्बर हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। उन्होंने कहा, “कुछ पीड़ित महिलाओं ने रोते हुए कहा, ‘हमें भी मार डालो’। आतंकियों ने जवाब दिया, ‘नहीं, वापस जाओ और बताओ कि तुम्हारे साथ क्या हुआ।’

पनामा से थरूर का आतंकवाद पर प्रहार: "चीखें सुनी हैं, अब खामोश नहीं रहेंगे"
फोटो: पनामा से थरूर का आतंकवाद पर प्रहार: "चीखें सुनी हैं, अब खामोश नहीं रहेंगे"
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पनामा में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रासंगिकता को विस्तार से समझाया। उन्होंने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अब आतंकी अपनी हरकतों की कीमत चुका रहे हैं। थरूर ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उस बर्बर हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। उन्होंने कहा, “कुछ पीड़ित महिलाओं ने रोते हुए कहा, ‘हमें भी मार डालो’। आतंकियों ने जवाब दिया, ‘नहीं, वापस जाओ और बताओ कि तुम्हारे साथ क्या हुआ।’ हमने उनकी चीखें सुनीं और भारत ने फैसला किया कि अब चुप नहीं रहेंगे। हमारी महिलाओं के सिंदूर उजाड़ने वालों को इसकी कीमत चुकानी होगी।”

थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया था कि ऑपरेशन सिंदूर आवश्यक था, क्योंकि आतंकवादियों ने एक झटके में 26 महिलाओं के पति और पिता को छीन लिया, उनका पूरा जीवन उजाड़ दिया। उन्होंने भारत की बदलती सैन्य रणनीति को रेखांकित करते हुए कहा, “अब आतंकवादियों को यह समझ में आ गया है कि भारत जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। 2016 में उरी हमले के बाद भारत ने पहली बार नियंत्रण रेखा पार कर आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। फिर 2019 में पुलवामा के बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक कर भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा तक लांघ दी — यह स्पष्ट संकेत था कि अब हम खामोश नहीं रहेंगे।”

थरूर ने 26/11 मुंबई हमलों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने ठोस सबूत दिए — ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, डोजियर, खुफिया रिपोर्टें — लेकिन पाकिस्तान ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। “क्या उन हमलों के मास्टरमाइंड को सजा मिली? क्या किसी एक आरोपी पर मुकदमा चला? नहीं। पश्चिमी एजेंसियों तक ने पाकिस्तान के आतंकियों की भूमिका स्वीकार की, लेकिन फिर भी कार्रवाई न के बराबर हुई।” थरूर ने कहा कि भारत अब केवल वैश्विक सहानुभूति और समर्थन मांगने तक सीमित नहीं रहेगा। “अब समय आ गया है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाए। हमें यह मंजूर नहीं कि हम केवल शोक मनाते रहें और दूसरों से सहानुभूति की उम्मीद करें।”

उन्होंने कहा कि 1989 से शुरू हुए कश्मीर में आतंकी हमलों से लेकर आज तक भारत लगातार आतंकवाद का शिकार रहा है। “हर दशक में, हर कोने में निर्दोष नागरिक निशाना बनाए गए हैं। अब हमें केवल सहना नहीं है — हमें जवाब देना है।”