सुरंग में कीचड़ का अंबार, ऑक्सीजन की भारी कमी
मंत्री ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद जानकारी दी कि ढही हुई सुरंग के भीतर भारी मात्रा में कीचड़ जमा हो गया है। उन्होंने कहा, "जब हमने अंदर की तस्वीरें लीं, तो सुरंग का अंतिम सिरा दिखाई दे रहा था। सुरंग का व्यास लगभग 9 मीटर (करीब 30 फीट) है, जिसमें से 25 फीट तक कीचड़ भरा हुआ है। ऐसे में वहां किसी के बचने की संभावना लगभग शून्य हो जाती है।" सुरंग हादसे में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए उत्तराखंड के सिल्क्यारा सुरंग बचाव अभियान में शामिल रहे विशेषज्ञ खनिकों की टीम को तैनात किया गया है। मंत्री ने बताया कि बचाव दल को अभी भी मलबे और गाद के कारण भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, और फंसे हुए श्रमिकों तक पहुंचने में कम से कम तीन से चार दिन का समय लग सकता है।
सुरंग में ऑक्सीजन की आपूर्ति और जल निकासी की कोशिशें
अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के अंदर ऑक्सीजन पंप की जा रही है, लेकिन कीचड़ और मलबे के कारण यह श्रमिकों तक पहुंच पाएगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। मंत्री ने कहा, "अगर यह मान भी लें कि कुछ श्रमिक टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) के निचले हिस्से में हैं, तो भी वहां ऑक्सीजन कैसे पहुंचेगी?" भारतीय सेना, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां शनिवार से ही बचाव अभियान में लगी हुई हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। अधिकारी मलबा हटाकर दुर्घटनास्थल तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों की तलाश कर रहे हैं।
दो दिनों से सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों की पहचान उत्तर प्रदेश के मनोज कुमार और श्रीनिवास, जम्मू-कश्मीर के सन्नी सिंह, पंजाब के गुरप्रीत सिंह और झारखंड के संदीप साहू, जेगता जेस, संतोष साहू और अनुज साहू के रूप में हुई है।
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