इससे पहले, तेजस्वी यादव ने बिहार में बढ़ते अपराधों की एक सूची सार्वजनिक की थी, जिस पर ललन सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ललन सिंह ने कहा था, "अपराध किसे कहते हैं? क्या जो सामान्य घटनाएं होती हैं, उन्हें अपराध कहा जा सकता है? पहले अपने माता-पिता के शासन को देख लें, उस समय बिहार में कितना अपराध होता था। अपहरण का उद्योग चलता था, फिरौती कहां वसूली जाती थी, यह सब देखना चाहिए। तेजस्वी यादव को यह समझने की जरूरत है कि केवल कुछ कागज जारी कर देने से मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। उन्हें अनुभव की कमी है, और उन्हें यह सब सीखने की जरूरत है।"
ललन सिंह ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने से कोई मुख्यमंत्री नहीं बन जाता, और उनका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा। उनका यह बयान भी इस बात की ओर इशारा करता है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू, एनडीए और महागठबंधन के बीच आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर मुकाबला हो सकता है।
बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और इस चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियां पूरी तैयारी में जुटी हुई हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन चुनाव मैदान में उतरेगा, जिसमें भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियां शामिल हैं।
वहीं, महागठबंधन में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी और कांग्रेस सहित कई सहयोगी दल इस चुनाव में अपनी दावेदारी पेश करेंगे।
बिहार में इस बार का चुनाव खासतौर पर सीएम पद के लिए तेजस्वी यादव के नाम को लेकर चर्चा में है, क्योंकि महागठबंधन में सबसे मजबूत दावेदार वही माने जा रहे हैं। तेजस्वी की राजनीतिक यात्रा को लेकर उनके समर्थक आश्वस्त हैं, और यह देखा जा रहा है कि किस तरह से यह चुनाव बिहार की राजनीति के भविष्य को आकार देगा। वहीं, नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए गठबंधन भी पूरी ताकत से चुनाव मैदान में है, और इस चुनाव में प्रमुख मुकाबला महागठबंधन और एनडीए के बीच होगा।
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