बैठक में क्या हुआ
सोमवार को एनसीपी प्रमुख़ अजीत पवार ने पार्टी की बैठक बुलायी। बैठक को बुलाने का मक़सद महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने और लोकसभा के चुनाव की समीक्षा करना था। उन्होंने सभी नेताओं और विधायकों से पता लगाने की कोशिश की है कि क्या महायुति का हिस्सा बनने से फायदा हुआ या नहीं। भुजबल ने कहा कि जब वे भाजपा-शिवसेना के गठबंधन में शामिल हुए थे, तब एनसीपी को विश्वास दिलाया गया थी कि उनकी पार्टी को महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में 80 से 90 सीटें दी जायेंगी। उन्होंने कहा कि एनसीपी को लोकसभा के चुनाव में भी कम सीटें दी गयी हैं। भुजबल ने अजीत पवार की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि हमें भाजपा को बता देना चाहिये कि हम अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, ताकि एनसीपी 50 से 60 सीटें जीत सके। भुजबल ने हैरानी जताते हुए कहा कि अगर एनसीपी की मौजूदा संख्या की वज़ह से 50 सीटें दी गयी तो पार्टी कितनी ही सीट जीत पायेगी?
एनसीपी राजनीतिक भागीदारी को लेकर नाराज़
ख़बरों के अनुसार अजीत पवार लोकसभा चुनाव में पार्टी को कम महत्व मिलने से नाराज़ चल रहे हैं। अजीत को उम्मीद थी कि महायुति गठबंधन एनसीपी को अधिक सीटें देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए अजीत महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों से पहले सभी चीज़ों को स्पष्ट करना चाहते हैं। भाजपा गठबंधन ने महाराष्ट्र में कुल 48 लोकसभा की सीटों को लेकर जो फॉर्मूला तैयार किया था, उसमें एनसीपी को 4 सीटें दी गयी थी। बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा है।
अजित पवार ने पार्टी को भरोसा दिया है कि विधान सभा के चुनाव में पार्टी के हर नेता और कार्यकर्ता को समान अवसर दिया जायेगा। एनसीपी कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा, “सीटों के बंटवारे में हमें उचित हिस्सेदारी मिलेगी। अब बीजेपी भी जानती है कि राज्य में सत्ता वापस पाने के लिए कुछ सीटों पर इंतज़ाम किया जाना जरुरी है।”





