सुखबीर सिंह बादल और उनकी सरकार के मंत्रियों को अपने शासनकाल में कई विवादास्पद और गंभीर गलत फैसले लेने का दोषी पाया गया है। इनमें सबसे चौंकाने वाला और विवादास्पद मामला डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को माफी देने का है, जिसने सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई। बादल ने अंततः पवित्र स्वर्ण मंदिर में धर्मगुरुओं के समक्ष विनम्रतापूर्वक अपनी गलती स्वीकार की है। इस घटनाक्रम के बाद, उन्होंने अकाली दल के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। मुखिया रघबीर सिंह ने पार्टी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे तीन दिन के भीतर उनका इस्तीफा स्वीकार करें और आगामी 6 महीनों में एक नए सक्षम नेतृत्व का चयन करें।
राम रहीम द्वारा गुरु गोबिंद सिंह जी की वेशभूषा की नकल
यह चौंकाने वाला विवाद 2007 का है, जब डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने सिख धर्म की पवित्र परंपराओं का अपमान करते हुए गुरु गोबिंद सिंह जी की वेशभूषा में लोगों को अमृत चखाने का दुस्साहस किया था। इस कृत्य ने सिख समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा किया। हालांकि इस गंभीर मामले में राम रहीम पर मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से अकाली सरकार ने बाद में यह केस वापस ले लिया। इस विवादास्पद निर्णय के परिणामस्वरूप, अकाल तख्त ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से प्रतिष्ठित फकर-ए-कौम की उपाधि वापस ले ली है।
30 अगस्त को सुखबीर को अकाल तख्त द्वारा 'तनखैया' घोषित किया गया था। अकाल तख्त के अनुसार, अकाली दल ने 2007 से 2017 के बीच पंजाब सरकार में रहते हुए कई गलत राजनीतिक निर्णय लिए। इस संबंध में, अकाल तख्त जत्थेदार ने गोल्डन टेंपल में पांच 'सिंह साहिबों' की बैठक बुलाई और सुखबीर सिंह बादल को सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया।





