“मुसलमानों को धोखा दिया गया है” – शाहजेब रिजवी
अपने वीडियो में रिजवी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो नेता खुद को सेक्युलर कहते थे, आज वही मुस्लिमों के खिलाफ लाए जा रहे कानूनों को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में RLD के 10 विधायक चुने गए, जिनकी जीत में मुसलमानों की भूमिका बेहद अहम रही, लेकिन अब पार्टी ने उनकी आवाज़ को अनसुना कर दिया है।
उन्होंने कहा, “सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन उसूलों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। जयंत चौधरी अपने दादा चौधरी चरण सिंह की विचारधारा से भटक चुके हैं।”
शाहजेब रिजवी ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी नेता खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं, लेकिन जब मुस्लिम समुदाय को समर्थन की ज़रूरत होती है, तब ये चुप्पी साध लेते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि वक्फ बिल जैसे फैसले समाज में भाईचारे को नुकसान पहुंचा सकते हैं, और यह देश के हित में नहीं होगा। अंत में उन्होंने आरएलडी से औपचारिक तौर पर इस्तीफे का ऐलान किया और मुसलमानों से अपील की कि वे “चुनाव के समय सोच-समझकर फैसला लें और उन नेताओं से दूर रहें जो समय पड़ने पर उनके साथ खड़े नहीं होते।”
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सिर्फ आरएलडी ही नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता में साझेदार जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर भी विरोध की लहर उठ चुकी है। पार्टी के कई मुस्लिम नेताओं ने विधेयक के समर्थन पर नाराज़गी जताते हुए इस्तीफा दे दिया है।
अब तक जेडीयू के जिन नेताओं ने इस्तीफा दिया है, उनमें शामिल हैं:
प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मोहम्मद
प्रदेश महासचिव मो. तबरेज़े अलीग
भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान रेन
पूर्वी चंपारण से मोहम्मद कासिम अंसारी
पूर्व युवा मोर्चा उपाध्यक्ष तबरेज हसन
हालांकि, जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इन इस्तीफों को “फर्जी” बताया है और दावा किया कि इनमें से कई लोग पार्टी के अधिकृत पदाधिकारी ही नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जेडीयू पूरी तरह से वक्फ विधेयक का समर्थन करती है, क्योंकि इससे “गरीब मुसलमानों को लाभ मिलेगा।”
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