एनजीओ ने दी विस्तृत जानकारी, कोर्ट ने मांगा और विवरण
एनजीओ ‘रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने अदालत को सूचित किया कि उन्होंने पहले ही एक हलफनामा दायर कर रोहिंग्या शरणार्थियों की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इन शरणार्थियों के पास संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) द्वारा जारी पहचान पत्र मौजूद हैं, जो उनकी स्थिति को प्रमाणित करता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस पर कहा कि यदि इन शरणार्थियों के पास UNHCR कार्ड मौजूद हैं, तो एनजीओ के लिए उनका पूरा विवरण उपलब्ध कराना अपेक्षाकृत आसान होगा। इसके बाद गोंजाल्विस ने अतिरिक्त जानकारी प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया और मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद निर्धारित की।
रोहिंग्या शरणार्थियों को आधार कार्ड न होने से हो रही परेशानी
इससे पहले, 31 जनवरी को शीर्ष अदालत ने एनजीओ से स्पष्ट करने को कहा था कि दिल्ली में रोहिंग्या शरणार्थी किन इलाकों में बसे हुए हैं और उन्हें सरकार की कौन-कौन सी सुविधाएं मिल रही हैं। इसके अलावा, अदालत ने एनजीओ से हलफनामा दाखिल कर उनके ठिकानों का ब्योरा देने को कहा था।
गोंजाल्विस ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि रोहिंग्या शरणार्थियों को स्कूलों और अस्पतालों तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं है। उन्होंने कहा, "ये शरणार्थी हैं, जिनके पास UNHCR द्वारा जारी पहचान पत्र हैं, लेकिन भारत सरकार उन्हें आधार कार्ड जारी नहीं करती। आधार कार्ड न होने के कारण उन्हें सरकारी स्कूलों में दाखिला और अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पा रहा है।"
गोंजाल्विस ने बताया कि दिल्ली में रोहिंग्या शरणार्थी मुख्य रूप से शाहीन बाग, कालिंदी कुंज और खजूरी खास इलाकों में बसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि शाहीन बाग और कालिंदी कुंज में ये शरणार्थी झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे हैं, जबकि खजूरी खास में वे किराए के मकानों में रहते हैं।
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