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स्वास्थ्य बीमा से जीएसटी हटाने को लेकर विपक्ष ने किया संसद परिसर में प्रदर्शन

राहुल गाँधी ने कहा कि हर आपदा से पहले ‘टैक्स का अवसर’ तलाशना भाजपा सरकार की असंवेदनशील सोच का प्रमाण है। इंडिया गठबंधन इस अवसरवादी सोच का विरोध करता है।

स्वास्थ्य बीमा से जीएसटी  हटाने को लेकर विपक्ष ने किया संसद परिसर में प्रदर्शन
फोटो: स्वास्थ्य बीमा से जीएसटी हटाने को लेकर विपक्ष ने किया संसद परिसर में प्रदर्शन
स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी के खिलाफ इंडिया गठबंधन ने मंगलवार को संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल, केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा रखा है। स्वास्थ्य बीमा पर जनता दोहरा टैक्स देने के लिए मजबूर है। पहली बार पॉलिसी खरीदते समय और दूसरी बार मेडिकल क्लेम के बिल भुगतान के समय। संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के कई बड़े नेताओं ने भाग लिया।

इस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि जीवन में आने वाले ‘स्वास्थ्य संकट’ में किसी के आगे झुकना ना पड़े। इसलिए पाई-पाई जोड़ कर हर साल हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भरने वाले करोड़ों आम हिंदुस्तानियों से भी मोदी सरकार ने 24 हज़ार करोड़ रुपए वसूल लिए हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि हर आपदा से पहले ‘टैक्स का अवसर’ तलाशना भाजपा सरकार की असंवेदनशील सोच का प्रमाण है। इंडिया गठबंधन इस अवसरवादी सोच का विरोध करता है। राहुल ने सरकार से मांग की कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा को जीएसटी मुक्त करना ही होगा


टीएमसी नेता ने उठाया था राज्यसभा में मुद्दा

यह मुद्दा तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सोमवार को राज्यसभा में भी उठाया था। उन्होंने केंद्र सरकार से स्वास्थ्य बीमा पर 18 प्रतिशत जीएसटी को कम करने की मांग करते हुए कहा था कि यह एक ऐसा मुद्दा है जो लोगों, मुख्य रूप से मध्यम वर्ग पर बोझ डाल रहा है। इसलिए इसे कम करने की जरूरत है।

तृणमूल कांग्रेस नेता ने बताया था कि भारत में बीमा की पहुंच मात्र चार प्रतिशत है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह सात प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा उन्होंने कहा था की बीमा क्षेत्र में असंतुलन है, भारत में कुल पॉलिसियों में 75 प्रतिशत जीवन बीमा ​​हैं और 25 प्रतिशत चिकित्सा बीमा हैं। डेरेक ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस संबंध में वित्त मंत्री को पत्र लिखा है था और कई विपक्षी सांसदों ने भी इस मुद्दे को उठाया।

"वे(वित्त मंत्री) हमारी बात नहीं सुनती। वे कहती है कि मैं इस पर कुछ नहीं कर सकती यह काम जीएसटी परिषद का है। यह वित्त मंत्री द्वारा दिया गया एक घटिया कारण है। सुप्रीम कोर्ट भी मानता है कि जीएसटी परिषद एक सलाहकार संस्था है। वित्त मंत्री को जीएसटी परिषद के पर्दे के पीछे नहीं छिपना चाहिए। अगर वे हमारी बात नहीं सुनती तो कम से कम कैबिनेट मंत्री नितिन गडकरी की बात तो सुनिए, जिन्होंने वित्त मंत्री को पत्र लिखा है" डेरेक ने कहा था।

दरअसल, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 28 जलाई की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा था। उन्होंने भी पत्र में जीवन और चिकित्सा बीमा पॉलिसी के प्रीमियम पर लगाये गये 18 फ़ीसदी जीएसटी को वापस लेने का आग्रह किया था।