जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े के साथ रिक्त हुआ राज्यसभा के सभापति का पद
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के साथ ही राज्यसभा के सभापति का पद भी स्वचालित रूप से रिक्त हो गया है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। ऐसे में जब उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, तो राज्यसभा की कार्यवाही अब उपसभापति हरिवंश प्रसाद की अध्यक्षता में चलेगी। राष्ट्रपति चाहें तो किसी अन्य वरिष्ठ सदस्य को भी अस्थायी तौर पर सभापति का कार्यभार सौंप सकती हैं। भारतीय संविधान के तहत उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने की स्थिति में जल्द से जल्द चुनाव कराना अनिवार्य है। मृत्यु, त्यागपत्र या अन्य किसी कारण से यह पद खाली हो जाने पर निर्वाचन आयोग को निर्धारित प्रक्रिया के तहत शीघ्र चुनाव कराना होता है।
जगदीप धनखड़ देश के ऐसे तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल के बीच इस्तीफा दिया है। इससे पहले वी. वी. गिरि ने 20 जुलाई 1969 और आर. वेंकटरमण ने 24 जुलाई 1987 को राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दिया था। वहीं पूर्व उपराष्ट्रपति कृष्णकांत का कार्यकाल के दौरान निधन हो गया था।
जगदीप धनखड़ इस्तीफे से पहले सोमवार को पूरे दिन राज्यसभा की कार्यवाही में सक्रिय रहे। सुबह उन्होंने विपक्षी दलों को संसद को संवाद और रचनात्मक चर्चा का मंच बनाने की सलाह दी।
दोपहर बाद उन्होंने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार करते हुए उससे जुड़ी प्रक्रिया को सदन में विस्तार से स्पष्ट किया। साथ ही, न्यायमूर्ति शेखर यादव के खिलाफ लाए गए एक अन्य महाभियोग प्रस्ताव में एक सांसद के दोहरे हस्ताक्षर को लेकर जांच का आदेश भी दिया।





