यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष लेयेन ‘ईयू कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स’ यानी यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ दो दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बढ़ते संबंधों पर जोर दिया और व्यापार, रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक यात्रा को भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि "यूरोपीय आयोग के नए कार्यकाल की यह पहली यात्राओं में से एक है, जो हमारे रिश्तों की प्राथमिकता को दर्शाती है। भारत और ईयू की दो दशक पुरानी रणनीतिक साझेदारी प्राकृतिक रूप से मजबूत है और इसका आधार आपसी विश्वास है।" उन्होंने यह भी बताया कि इस यात्रा के दौरान 20 मंत्रीस्तरीय बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को 2025 के अंत तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 'स्पेस डायलॉग' शुरू करने का निर्णय लिया गया है। रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आपसी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद विरोधी प्रयासों (Counter-Terrorism Cooperation) को भी अगले स्तर पर ले जाया जाएगा।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन की प्रतिक्रिया
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में भारत-यूरोपीय संघ संबंधों की बढ़ती मजबूती पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "आज की दुनिया विभिन्न खतरों से घिरी हुई है, लेकिन यूरोप और भारत के पास मिलकर इन चुनौतियों का सामना करने और अपने रिश्तों को और मजबूत करने का अनूठा अवसर है।"
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरोपीय संघ सहयोग के माध्यम से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं और अलगाववाद की नीति से बचना चाहिए।
लेयेन ने जोर देकर कहा कि "प्रधानमंत्री मोदी और मैंने इस समझौते (FTA) को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई है। इसे सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए समय और प्रतिबद्धता की जरूरत होगी, और इस दिशा में मेरी पूरी निष्ठा रहेगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ईयू के बीच ‘ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल’ (TTC) को अगले स्तर तक ले जाने की जरूरत है ताकि व्यापार और तकनीकी नवाचार में सहयोग को और मजबूत किया जा सके।
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