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छठ-दिवाली पर ट्रेनों में भारी भीड़, कन्फर्म टिकट के बावजूद यात्रियों की बढ़ी परेशानी

छठ-दिवाली पर घर लौटने की जद्दोजहद बढ़ी, कन्फर्म टिकट नहीं मिलने से यात्री जनरल बोगी और महंगे एजेंट टिकटों पर निर्भर हैं।

छठ-दिवाली पर ट्रेनों में भारी भीड़, कन्फर्म टिकट के बावजूद यात्रियों की बढ़ी परेशानी
फोटो: Chhath Puja Train, Diwali Train, Rush Indian Railways, Confirmed Ticket, Bihar Migrant Workers

 

60 दिन पहले बुकिंग, फिर भी कन्फर्म टिकट नहीं

दिवाली और छठ के त्योहार नजदीक आते ही दिल्ली से बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। नई दिल्ली और आनंद विहार जैसे स्टेशनों पर बड़ी संख्या में यात्री घर जाने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। कई यात्रियों का कहना है कि 60 दिन पहले टिकट बुक करने की कोशिश के बावजूद कन्फर्म सीट नहीं मिल रही।

मुजफ्फरपुर जा रहे एक यात्री ने बताया कि दो महीने पहले से टिकट के लिए प्रयास करने के बावजूद टिकट कन्फर्म नहीं हुआ और अब जनरल टिकट लेकर सफर करना पड़ रहा है। करीब 1100 किलोमीटर के सफर में 20-22 घंटे तक खड़े रहने की चिंता भी यात्रियों ने जताई।

जनरल बोगी में सफर, परिवार और सामान की चिंता

यात्रियों के मुताबिक त्योहार के दौरान जनरल कोच में भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि बैठना तो दूर, कई बार खड़े होने की जगह भी नहीं मिलती। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के साथ सफर करने वालों की परेशानी और बढ़ जाती है। कुछ यात्रियों ने बाथरूम की स्थिति, सामान चोरी होने और लंबे सफर में सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई।

कई यात्रियों ने यह भी शिकायत की कि टिकट एजेंट सामान्य किराए से काफी ज्यादा पैसे मांग रहे हैं। कुछ मामलों में ₹600-700 के टिकट के लिए ₹1500-2000 तक वसूले जाने का दावा किया गया। थर्ड-पार्टी ऐप के जरिए टिकट बुक करने वाले कुछ यात्रियों ने वेटिंग टिकट रिजेक्ट होने और रिफंड में देरी की शिकायत भी की।

रेलवे की स्पेशल ट्रेनें, लेकिन यात्रियों को राहत कितनी?

ग्राउंड रिपोर्ट में यात्रियों ने कहा कि छठ बिहार और पूर्वांचल का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, इसलिए इस दौरान अतिरिक्त ट्रेनें और बेहतर व्यवस्था की जरूरत है। रेलवे ने त्योहारों के लिए 150 से अधिक पूजा स्पेशल ट्रेनें चलाने और हजारों अतिरिक्त ट्रिप संचालित करने की बात कही है। इसके बावजूद यात्रियों का कहना है कि कई रूटों पर टिकट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और स्पेशल ट्रेनों की जानकारी भी ऑनलाइन स्पष्ट रूप से नहीं मिलती।

कुछ यात्रियों ने नई दिल्ली स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन और अलग कॉरिडोर जैसी व्यवस्थाओं में सुधार की बात भी कही। यानी समस्या केवल स्टेशन प्रबंधन की नहीं, बल्कि टिकट बुकिंग और ट्रेन उपलब्धता की भी है।

रोजगार का सवाल भीड़ के पीछे की बड़ी वजह

यात्रियों की शिकायतों के बीच एक बड़ा मुद्दा बिहार और पूर्वी राज्यों में रोजगार का भी सामने आया। कई प्रवासी श्रमिकों ने कहा कि अगर उनके गृह राज्य में पर्याप्त रोजगार मिलता, तो उन्हें दिल्ली, मुंबई, गुजरात जैसे शहरों में काम के लिए नहीं आना पड़ता।

छठ के मौके पर घर लौटना उनके लिए सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि परिवार और गांव से जुड़ने की भावनात्मक जरूरत है। रिपोर्ट में रेलवे व्यवस्था के साथ रोजगार और पलायन की समस्या को भी जोड़ते हुए सवाल उठाया गया कि त्योहारों के समय लाखों यात्रियों को सम्मानजनक और सुरक्षित सफर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर - https://youtu.be/laky0Owf3Lg?si=vb6ZDjREcuA-ECoj

 
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