।
प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 157वें स्थान पर
YouTube कार्यक्रम में भारत की प्रेस स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। चर्चा में कहा गया कि Reporters Without Borders (RSF) के 2026 के प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर है। इसी संदर्भ में ‘Press Freedom Predators’ सूची का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कार्यक्रम के अनुसार भारत से अडानी समूह और ऑप इंडिया के नाम शामिल हैं।
अडानी समूह पर कानूनी दबाव के आरोप
कार्यक्रम में अडानी समूह के मीडिया क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव और पत्रकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर चर्चा हुई। वक्ताओं ने दावा किया कि कुछ स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ मानहानि के मामले दर्ज हुए, जिससे पत्रकारों में ‘चिलिंग इफेक्ट’ यानी कानूनी कार्रवाई के डर से खबरों से पीछे हटने की स्थिति बन सकती है। NDTV और अन्य मीडिया संस्थानों में अडानी समूह की हिस्सेदारी का भी संदर्भ दिया गया।
स्क्रिप्ट में अडानी समूह की कारोबारी वृद्धि को प्रधानमंत्री Narendra Modi के राजनीतिक सफर से जोड़ते हुए सवाल उठाए गए। हालांकि, ये कार्यक्रम में व्यक्त राजनीतिक विश्लेषण और आरोप हैं।
ऑप इंडिया और टीवी मीडिया की भूमिका पर बहस
चर्चा में ऑप इंडिया पर कथित ‘स्मियर कैंपेन’ और सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाले नैरेटिव का आरोप लगाया गया। साथ ही मुख्यधारा के टीवी मीडिया पर राजनीतिक पक्षधरता और बहसों में आपत्तिजनक भाषा को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए।
कार्यक्रम में पत्रकारों के सोशल मीडिया पोस्ट हटने, अकाउंट की पहुंच सीमित होने और कंटेंट रिकमेंडेशन प्रभावित होने जैसी समस्याओं का भी जिक्र हुआ। वक्ताओं ने कहा कि स्पष्ट नियम न होने से पत्रकारों और डिजिटल क्रिएटर्स के बीच आत्म-सेंसरशिप बढ़ सकती है।
धीरेंद्र शास्त्री, राहुल गांधी और राजनीतिक बहस
स्क्रिप्ट में धीरेंद्र शास्त्री से जुड़े विवाद, रजत शर्मा की प्रतिक्रिया और अखिलेश यादव के जवाब का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ मीडिया हस्तियां पत्रकारिता से अधिक राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देती दिखाई देती हैं।
राहुल गांधी की बहस की चुनौती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर उनके सवालों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में अमेरिका, डोनाल्ड ट्रंप, अडानी से जुड़े मामलों और भारत की विदेश नीति को लेकर कई गंभीर दावे किए गए, लेकिन इन दावों के समर्थन में स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए।
अंत में वक्ताओं ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता का सवाल केवल किसी एक कारोबारी समूह या मीडिया संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक दबाव, मीडिया की पक्षधरता, कानूनी कार्रवाई और सोशल मीडिया नियंत्रण समेत पूरे मीडिया इकोसिस्टम से जुड़ा मुद्दा है।





