प्रियंका ने कहा कि यूरोप के कई देशों में कट्टरवाद और आतंकवाद के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता है, और वहां के सुरक्षा एजेंसियों को भी यह मालूम है कि इन घटनाओं की जड़ें पाकिस्तान से जुड़ी हैं। उन्होंने चेताया कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आतंक के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति जरूरी है।
चतुर्वेदी ने पाकिस्तान के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र (UN) पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ऐसा देश, जहां 52 से अधिक आतंकी खुलेआम घूम रहे हैं, उसे UN सुरक्षा परिषद में काउंटर टेररिज्म समिति का उपाध्यक्ष बना दिया गया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “ये तो वैसा ही है जैसे मसूद अजहर को शांति का प्रोफेसर बना देना, या फिर हाफिज सईद और मसूद अजहर को नोबेल शांति पुरस्कार देना।”
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने एक सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में भेजा था ताकि विश्व समुदाय को भारत के रुख और आतंकवाद की वास्तविकता से अवगत कराया जा सके। प्रियंका चतुर्वेदी को यूरोप की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी, जहाँ उन्होंने भारत की स्थिति दृढ़ता से रखी।





