विपक्ष ने आयोग पर उठाये गंभीर सवाल
विपक्ष ने आयोग से सवाल पूछा है कि प्रथम चरण में हुए कुल मतदान के आँकड़ों को जारी करने में 10 दिन क्यों लगे? विपक्ष का कहना है कि आमतौर पर आयोग अपने अंतिम आंकड़ों को चुनाव ख़त्म होने के 24 घंटों के भीतर ही जारी कर देता था। लेकिन आयोग को आँकड़े जारी करने में इतना समय क्यों लग रहा है, ये समझ से परे है। आयोग के अनुसार प्रथम चरण के दौरान 66.14 फ़ीसद और दूसरे चरण के दौरान 66.7 फ़ीसद मतदान हुआ है।
कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के चेयरमैन जयराम रमेश ने आयोग की तरफ़ से देरी से जारी हुए आँकड़ों को लेकर सवाल खड़े किये है। उन्होंने कहा है कि पहली बार आयोग ने मतदान के आँकड़ों को जारी करने में 10 दिन का समय लगा दिया है, फिर भी आयोग की तरफ़ से अंतिम आंकड़ों को जारी नहीं किया गया है। केवल अनुमानित आंकड़ों को जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर लोकसभा और विधानसभा के पंजीकृत मतदाताओं की संख्याओं को भी नहीं बताया गया है, केवल राज्य और प्रत्येक बूथ के मतदाताओं की संख्या को ही जारी किया गया है। ऐसे में आयोग की पारदर्शिता पर भी सवाल उठते हैं।
टीएमसी नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने मतदान के बाद होने वाली आयोग की तरफ़ से प्रेस कॉन्फ्रेंस के न होने पर सवाल खड़े किये हैं। ब्रयान ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी ने संसद में क़ानून बनाकर चुनाव आयोग को नष्ट करने का काम किया है।
एनसीपी(शरदचंद्र पवार) नेता सुप्रिया सुले ने आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और लोकतंत्र की नींव इस समय सवालों के घेरे में है। चुनाव आयोग के लिए ये वो घड़ी है जहाँ उन्हें अपनी निष्पक्षता और ज़वाबदेही को सुनिश्चित करना होगा। आयोग के ऊपर कई तरह का अनुचित दवाब बनाया जा रहा है, आयोग को ऐसे समय में अपने अधिकार के दावों का उपयोग करना होगा, ताकि आयोग की पारदर्शिता को साबित किया जा सके। आयोग ने अभी तक दो चरणों में हुए चुनावों का कोई आधिकारिक आँकड़ा जारी क्यों नहीं किया है।
सुप्रिया ने कहा कि भाजपा के नेता हर दिन आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे है, लेकिन चुनाव आयोग भाजपा के नेताओं पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा है कि आयोग की तरफ़ से हो रही देरी काफ़ी चिंताजनक है, जो आयोग की लापरवाहियों का ही नतीज़ा है।उधर हर दिन भाजपा के नेताओं की तरफ़ से आचार संहिता का मज़ाक बनाया जा रहा है। भाजपा अभद्रता और घृणा वाली भाषा पर उतर आयी है।
आयोग की तरफ़ से मतदान के आँकड़ों को लेकर होने वाली देरी पर सीपीआईएम के नेता सीताराम येचुरी ने भाजपा पर निशाना साधा है। उहोंने कहा कि जब भाजपा की सरकार केंद्र में नहीं थी, तब आयोग की तरफ़ से मतदान के आँकड़े आसानी से उपलब्ध हो जाते थे। आयोग की तरफ़ से होने वाली देरी के कारण चुनावी नतीजों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने कहा कि आयोग और मीडिया की तरफ़ से जारी मतदान के आँकड़ों में इतना अंतर क्यों है। मीडिया के अनुसार दो चरणों में कुल मैदान 60 फ़ीसद हुआ है लेकिन आयोग की तरफ़ से यही आँकड़ा 66 फ़ीसद है। आँकड़ों में इतने बड़े अंतर को लेकर दुबे ने हैरानी जतायी है।





