पीके ने जेडीयू के सांसदों से अपील की कि वे इस बिल पर सदन में किसी भी हाल में वोट न करें। साथ ही, उन्होंने जेडीयू के मुस्लिम नेताओं से भी अपील की कि वे अपने सांसदों से कहें कि वे इस बिल के खिलाफ मतदान करें।
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी जन सुराज वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ है, क्योंकि यह बिल सीधे तौर पर मुसलमानों के हितों को प्रभावित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सरकार मुस्लिम समुदाय को विश्वास में लिए बिना वक्फ कानून लाती है, तो यह पूरी तरह से गलत होगा। पीके ने संविधान में अल्पसंख्यकों को दिए गए अधिकारों में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को बिना समाज की सहमति के असंवैधानिक करार दिया।
प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को यह याद दिलाया कि 2015 के विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए महागठबंधन को अपना वोट दिया था। अब यदि नीतीश कुमार वक्फ बिल का समर्थन करते हैं, तो यह मुस्लिम समुदाय से किया गया उनका वादा टूट जाएगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को यह समझना चाहिए कि उनका मुख्यमंत्री बनना मुसलमानों के समर्थन से ही संभव हुआ था। अगर वे इस बिल के खिलाफ वोट नहीं करते, तो यह गांधी और लोहिया के सिद्धांतों से बेवफाई होगी, और वे खुद को इनके अनुयायी कहने का हक नहीं रखेंगे।
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को यह स्वीकार करना होगा कि इस बिल के समर्थन से वे अपनी पार्टी और मुस्लिम समुदाय के बीच एक खाई पैदा कर रहे हैं, जो आने वाले समय में उनकी राजनीति के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। साथ ही, उन्होंने बिहार की राजनीति में मुस्लिम समुदाय के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि यह समुदाय हमेशा से बिहार की राजनीति का अहम हिस्सा रहा है।
इस बीच, प्रशांत किशोर ने जेडीयू के मुस्लिम नेताओं से यह भी कहा कि उन्हें अपने दल के फैसलों पर पुनर्विचार करना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका समर्थन उन मुद्दों के साथ हो, जो उनके समुदाय के हित में हों।
Read This Also:- वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बोले इमरान मसूद, ‘राम का वंशज हूँ, ट्रस्ट का सदस्य बनाओ’
Read This Also:- वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बोले इमरान मसूद, ‘राम का वंशज हूँ, ट्रस्ट का सदस्य बनाओ’





