वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने लक्सन के भारत के प्रति गहरे संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा,
"लक्सन भारत से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने होली के रंगों में घुलकर जिस तरह से उत्सव का माहौल बनाया, वह दर्शाता है कि उन्हें भारत और यहां के लोगों से गहरा लगाव है। उनके साथ आया कम्युनिटी डेलीगेशन भी इसका प्रमाण है।"
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेनाओं के संयुक्त सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने यह जानकारी दी कि न्यूजीलैंड की सेना का एक जहाज जल्द ही मुंबई पोर्ट पर पहुंचेगा।
भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हुई चर्चा
बैठक में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने एक परस्पर लाभकारी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर वार्ता शुरू करने का निर्णय लिया। इस समझौते से व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
पीएम मोदी ने कहा,
"भारत आए न्यूजीलैंड के बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल को यहां नई संभावनाओं को देखने और समझने का अवसर मिलेगा। खेल, शिक्षा, डिजिटल लेन-देन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में हमारे संबंध और मजबूत होंगे।"
खेल संबंधों को लेकर विशेष योजना:
दोनों देशों के बीच क्रिकेट, हॉकी और माउंटेनियरिंग जैसे खेलों में ऐतिहासिक संबंध रहे हैं।
2026 में भारत-न्यूजीलैंड खेल साझेदारी के 100 वर्ष पूरे होंगे, जिसे खास अंदाज में मनाने का निर्णय लिया गया है।
दोनों देश स्पोर्ट्स साइंस, साइकोलॉजी और मेडिसिन में सहयोग को लेकर भी प्रतिबद्ध हैं। भारत ने न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटीज को भारत में कैंपस खोलने का आमंत्रण दिया है। साथ ही यूपीआई कनेक्टिविटी और डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में अस्वीकार्य है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा:
"चाहे 15 मार्च 2019 का क्राइस्ट चर्च आतंकी हमला हो या 26 नवंबर 2008 का मुंबई हमला, आतंकवाद के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है। भारत और न्यूजीलैंड आतंकवादी, अलगाववादी और कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने न्यूजीलैंड में सक्रिय कुछ भारत विरोधी तत्वों को लेकर अपनी चिंता साझा की और आशा जताई कि इस मामले में न्यूजीलैंड सरकार का सहयोग आगे भी मिलता रहेगा।
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