यूपी सरकार के इस आदेश से सहमत नहीं
समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पहले मुजफ्फरनगर प्रशासन द्वारा और अब यूपी सरकार के द्वारा इस तरह के आदेश से सहमत नहीं हैं। एलजेपी(रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, “गरीबों के लिए काम करना हर सरकार की जिम्मेदारी है, जिसमें समाज के सभी वर्ग जैसे दलित, पिछड़े, ऊंची जातियां और मुसलमान भी शामिल हैं।” उन्होंने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जब भी जाति या धर्म के नाम पर ऐसा विभाजन होता है, तो मैं इसका समर्थन या प्रोत्साहन बिल्कुल नहीं करता। मुझे नहीं लगता कि मेरी उम्र का कोई भी शिक्षित युवा, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म से आता हो, ऐसी चीजों से प्रभावित होता है।
केंद्र और राज्य सरकार से बात करेंगे
आरएलडी के राष्ट्रीय सचिव अनुपम मिश्रा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि सबसे पहले, हमारी पार्टी का रुख यह है कि अगर कोई ऐसा फैसला लिया जाता है जिसका असर लोगों के बड़े वर्ग पर पड़ता है, तो सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। दूसरी बात, इसका समय गलत है।
मिश्रा ने खाद्य सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए कहा, “हर भोजनालय को अपना नाम और अपने उत्पादों का विवरण प्रदर्शित करना होता है। अगर पुलिस को इस तरह का कोई आदेश लागू करना है, तो इसे शाकाहारी और मांसाहारी में विभाजित करें, जिसमें लाल या हरे रंग के चिह्न हो, जैसे कि खाद्य पैकेट पर होते हैं। हमारे देश में विभिन्न समुदायों के लोग रहते हैं सभी के लिए समान सद्भाव बनाए रखना चाहिए।” मिश्रा ने कहा कि यूपी सरकार में हमारे मंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। हम इस मुद्दे को केंद्र और राज्य में उठाएंगे कि इस तरह के दिशा निर्देश लागू नहीं किए जाने चाहिए।
हालांकि, भाजपा ने इस आदेश का बचाव करते हुए कहा कि पिछले साल भी यही आदेश लागू था। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, जो मुजफ्फरनगर से सांसद थे और हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में हार गए हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुजफ्फरनगर पुलिस का निर्देश कोई नई बात नहीं है, क्योंकि पिछले साल भी यही आदेश लागू थे।”





