घटना को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दबंगों के ख़िलाफ़ प्रशासन और सरकार ऐसी कार्रवाई करे, जो गलत करने वालों के लिए एक बड़ा उदहारण बनें। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्योंकि आरोपित दबंग है और प्रभावशाली हैं, इसलिए पुलिस मामले में ढ़ील बरत रही है।
घटना को लेकर कांग्रेस ने मोहन यादव की सरकार को घेरा और राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर चिंता ज़ाहिर की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि महिलाओं के साथ हुई घटना ने एक बार फिर बीजेपी के शासन में महिला सुरक्षा की पोल खोल कर रख दी है। उन्होंने कहा कि वैसे भी महिलाओं के ऊपर अत्याचार के मामले में मध्य-प्रदेश पहले स्थान पर है। पटवारी ने मोहन यादव की सरकार से सीधे सवाल कर पूछा कि क्या उंनके शासन में जिन महिलाओं को ज़िंदा दफ़नाने की कोशिश की गई थी, उन्हें जल्द से जल्द न्याय मिलेगा। क्योंकि बीजेपी की सरकार महिलाओं के ऊपर बढ़ रहे अत्याचार को रोकने में अब तक असमर्थ रही है।
कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा कि बीजेपी की सरकार में माफियाओं का बोलबाला है। राज्य में दलित, आदिवासी, महिलाओं को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।
क्या है पूरी घटना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, आशा पाण्डेय और ममता पाण्डेय सहित कुछ महिलाओं ने अपनी निजी ज़मीन पर सड़क बनाने का विरोध किया। जैसे ही डंपर सड़क बनाने वाली मोरंग गिराने के लिए आगे बढ़ा, महिलाओं ने गाडी के आगे आकर उसका विरोध किया। दबंगो के इशारों पर डंपर यहीं नहीं रुका उसने पूरा मोरंग महिलाओं के ऊपर गिरा दिया, जिसमें आशा पाण्डेय और ममता पाण्डेय मोरंग में धंस गई, अगर आस-पास के लोग दोनों महिलाओं को समय रहते न निकालते, तो दम घुटने से दोनों महिलाओं की जान भी जा सकती थी। फ़िलहाल, महिलाओं की स्थिति बेहतर बताई जा रही है। ममता पांडेय के पति जीवेश कुमार पांडेय और आशा पांडेय के पति शिवेष कुमार पांडेय ने कहा, “मामला साझे जमीन का है, उनके हिस्से की जमीन में से दबंगों द्वारा जबरदस्ती सड़क का रास्ता दिया जा रहा है। जबकि ज़मीन के दूसरे पक्ष गौकरण पाण्डेय से सड़क न बनाने को लेकर पहले ही बात हो चुकी थी”





