सूत्रों के अनुसार, दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग ने पहले दिल्ली उपराज्यपाल कार्यालय के माध्यम से गृह मंत्रालय से जांच की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने इस पर विचार करते हुए जांच की मंजूरी दी। यह कदम उस अनुरोध का परिणाम है, जिसे दिल्ली सरकार के सतर्कता विभाग ने प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उठाया था। अब गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद, दोनों नेताओं के खिलाफ चल रही जांच में तेजी आने की उम्मीद है, जो पहले से ही कानूनी मुसीबतों का सामना कर रहे हैं।
मनीष सिसोदिया, जो दिल्ली के उपमुख्यमंत्री रहते हुए आबकारी नीति घोटाले में पहले ही जेल में बंद हैं, और सत्येंद्र जैन, जो मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच का सामना कर रहे हैं, दोनों अब इस मंजूरी के बाद और अधिक गंभीर कानूनी मुद्दों का सामना कर सकते हैं। मनीष सिसोदिया के खिलाफ आरोप हैं कि उन्होंने शराब नीति 2021-22 में अनियमितताएं कीं और इस नीति को निजी कंपनियों के फायदे के लिए डिजाइन किया। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने शराब कारोबारियों से 100 करोड़ रुपये की रिश्वत ली, जिसका इस्तेमाल गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रचार के लिए किया गया।
इस मामले में सिसोदिया को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, और वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
वहीं, सत्येंद्र जैन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जांच शुरू की थी। ईडी का आरोप है कि जैन ने 2015-16 के दौरान फर्जी कंपनियों के माध्यम से 16.39 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की थी। सत्येंद्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया था। वह भी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
अब गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद, इन दोनों मामलों की जांच में और अधिक सख्ती और तेजी की संभावना है।
इससे दोनों नेताओं की स्थिति और जटिल हो सकती है, क्योंकि यह कदम एक नई जांच प्रक्रिया का उद्घाटन करता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के खिलाफ आरोपों के जांच में सरकारी तंत्र सक्रिय हो गया है और अब मामला केवल न्यायिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस पर प्रशासनिक और जांच एजेंसियों का पूरा ध्यान होगा।
इससे यह भी जाहिर होता है कि आम आदमी पार्टी के दोनों बड़े नेताओं के लिए आगे की राह और कठिन हो सकती है। इन दोनों मामलों से जुड़े आरोप, उनके राजनीतिक करियर और पार्टी की छवि पर भी असर डाल सकते हैं, क्योंकि जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है और इससे उनके खिलाफ और भी गंभीर आरोप सामने आ सकते हैं।
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