कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि शिरडी में मुफ्त भोजन की सुविधा साईं के भक्तों के दान से संचालित होती है, और इसमें बीजेपी नेता का कोई योगदान नहीं है। गायकवाड़ ने यह भी सुझाव दिया कि बीजेपी नेताओं को मुफ्त सलाह देने के बजाय, उन्हें अपने शिक्षण संस्थानों के जरिए मुफ्त शिक्षा प्रदान करनी चाहिए।
बीजेपी नेता का बयान
रविवार को शिरडी में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी नेता पाटिल ने श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट के सीईओ गोरक्ष गाडिलकर से अपील की थी कि श्रद्धालुओं को मुफ्त भोजन देना बंद कर दिया जाए। पाटिल ने कहा, "शिरडी में पूरे महाराष्ट्र से भिखारी भोजन करने आते हैं, और श्रद्धालु 10 रुपये का भुगतान कर सकते हैं, तो भोजन सेवा बंद करनी चाहिए।" इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो पैसा भोजन पर खर्च किया जा रहा है, वह बच्चों की शिक्षा में लगाया जाना चाहिए।
इस बयान के बाद कांग्रेस ने जोरदार विरोध जताया, और यह मामला मीडिया में चर्चा का विषय बन गया। महाराष्ट्र विधान परिषद की उप सभापति नीलम गोरे ने भी पाटिल के बयान की निंदा करते हुए कहा कि किसी को भी भिखारी जैसे आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग नहीं करना चाहिए। गोरे ने कहा, "क्या किसी सांसद के चुनावी अभियान को लेकर उन्हें भी भिखारी कहा जाएगा?"
शिरडी में मुफ्त भोजन का महत्व
साईं बाबा संस्थान हर दिन 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं को मुफ्त भोजन प्रदान करता है, और इसका खर्च भक्तों के द्वारा दिए गए दान से पूरा किया जाता है। पाटिल के बयान के बाद, उनके पिता और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि उनके बेटे का मतलब कुछ और था और मुफ़्त भोजन की सेवा बंद नहीं की जाएगी। शिवसेना नेता अक्षय महाराज भोसले ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिरडी में भक्तों को पवित्र प्रसाद के रूप में मिल रहे मुफ्त भोजन को भिखारी कहा जा रहा है।"
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