विधानसभा तक नहीं पहुंच सकी जन सुराज की रैली
सुबह 11 बजे प्रशांत किशोर के नेतृत्व में रैली का कार्यक्रम था, लेकिन तय समय पर न तो वे और न ही उनकी टीम विधानसभा या धरनास्थल तक पहुंच सकी। पुलिस की सख्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा बंदोबस्त के कारण जन सुराज समर्थकों को बेली रोड और आयकर गोलंबर जैसे प्रमुख रास्तों से विधानसभा की ओर बढ़ने नहीं दिया गया। चितकोहरा गोलंबर पर पुलिस ने रैली को रोका, जहां विरोध तेज होते ही लाठीचार्ज शुरू हो गया।
न सुराज पार्टी का यह प्रदर्शन तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित था, गरीब परिवारों को सरकार की घोषित दो लाख रुपये की सहायता अब तक क्यों नहीं मिली?
दलित भूमिहीन परिवारों को वादा की गई तीन डिसमिल जमीन क्यों नहीं दी गई?
भूमि सर्वेक्षण प्रक्रिया में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? पार्टी ने इन सवालों को लेकर एक करोड़ लोगों के हस्ताक्षर भी एकत्र किए थे, जिसे मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में प्रस्तुत किया जाना था। इसी क्रम में मतदाता पुनरीक्षण अभियान और बढ़ते अपराधों पर भी जन सुराज ने सरकार को घेरने की कोशिश की।
तीखी नोकझों के बाद लाठीचार्ज
प्रशांत किशोर के नेतृत्व में हजारों समर्थकों की भीड़ जैसे ही एयरपोर्ट से गर्दनीबाग की ओर बढ़ी, चितकोहरा में पुलिस ने रास्ता बंद कर दिया। वहां दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद लाठीचार्ज हुआ। इससे स्थिति और बिगड़ गई। कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए, और प्रशांत किशोर का काफिला भी चितकोहरा में ही फंसा रह गया। प्रदर्शन में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लाठीचार्ज की तीखी निंदा की। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने की कोशिश करार दिया। पार्टी प्रवक्ताओं का आरोप है कि सरकार सवालों से भाग रही है और जनता की आवाज़ दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।





