नाइक ने यह भी कहा कि वह हर तीन महीने में ठाणे में जनता दरबार लगाएंगे, ताकि यहां के लोग अपनी समस्याओं का समाधान पा सकें। ठाणे का यह इलाका एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है, क्योंकि वह इस क्षेत्र के प्रभारी मंत्री हैं और यहां से उनकी राजनीतिक पहचान भी जुड़ी हुई है। अब गणेश नाइक का यह कदम शिंदे के लिए एक नई चुनौती का रूप ले सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनकी राजनीतिक ताकत को चुनौती देने जैसा है।
शिवसेना से जुड़े नेताओं का मानना है कि भाजपा का यह कदम शिंदे को कमजोर करने के लिए उठाया जा रहा है। शिंदे गुट का आरोप है कि भाजपा अब ठाणे जिले में सक्रिय हो कर शिंदे के प्रभाव को चुनौती दे रही है। उनका यह भी कहना है कि भाजपा न केवल ठाणे, बल्कि अन्य जिलों में भी शिंदे गुट के प्रभारी मंत्रियों की सक्रियता बढ़ा कर उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाना चाहती है।
इसके अलावा, शिंदे ने नासिक और रायगढ़ के प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उस फैसले को स्थगित कर दिया गया था। अब गणेश नाइक ने ठाणे में अपनी सक्रियता बढ़ाने की घोषणा कर दी है, जिससे एकनाथ शिंदे को नई टेंशन का सामना करना पड़ा है।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं ने कहा कि गणेश नाइक ने यह कदम सोच-समझकर और भाजपा की रणनीति के तहत उठाया है। टूरिज्म मिनिस्टर शंभूराज देसाई ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी, और कहा कि यह कदम भाजपा के नेताओं द्वारा जानबूझकर उठाया गया है। वहीं शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हासके ने भी चेतावनी दी है कि अगर भाजपा ने ठाणे में अपनी गतिविधियां बढ़ाईं तो उनका गुट पालघर में जनता दरबार लगाएगा और लोगों के मुद्दों को उठाएगा।
गणेश नाइक ने ठाणे को लेकर यह भी कहा था कि अगर लोगों को यहां का सही विकास चाहिए तो उन्हें भाजपा का समर्थन करना होगा और कमल का फूल खिलाना होगा।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर वावनकुले ने भी नाइक का समर्थन किया और कहा कि पार्टी ने जिन क्षेत्रों में अपने मंत्रियों को तैनात किया है, वहां जनहित के कामों के लिए यह निर्णय लिया गया है। वावनकुले का कहना था कि एक मंत्री का दायित्व पूरे राज्य के लिए होता है और उनका काम सभी क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने शिंदे गुट की आपत्ति को भी खारिज किया और कहा कि यह कदम लोगों के लिए लाभकारी होगा, क्योंकि इससे उनके काम जल्दी हो सकेंगे।
इस विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है। शिंदे गुट और भाजपा के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह खींचतान किस दिशा में जाती है। क्या भाजपा ठाणे में अपनी सक्रियता बढ़ा कर शिंदे को राजनीतिक रूप से कमजोर कर पाएगी, या फिर शिंदे अपनी पकड़ मजबूत रखेंगे, यह सवाल अब राजनीति के केंद्र में है।
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