हालांकि, उनके समर्थकों का मानना है कि सुभाष नायर को सिंगापुर में भेदभाव और असमानता के खिलाफ मुंह खोलने के कारण यह सजा दी गई है। उनके अनुसार, सिंगापुर के अधिकारी उनकी सामाजिक लड़ाई को दबाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और यह कदम उस प्रयास का हिस्सा है।
सुभाष नायर की मुश्किलें 2020 में शुरू हुईं जब उन्होंने अपनी एक इंस्टाग्राम पोस्ट में एक विवादित घटना पर टिप्पणी की थी। यह पोस्ट उन्होंने 2019 में हुए ऑर्चर्ड टॉवर्स मर्डर मामले के संदर्भ में की थी। इस घटना में 31 वर्षीय भारतीय मूल के सिंगापुरियन सतीश नोएल गोबीदास की चाकू से हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद आरोपी चैन जिया जिंग पर हत्या का मामला दर्ज किया गया, लेकिन बाद में उसे कुछ शर्तों पर चेतावनी दे दी गई और इस मामले को कम करके देखा गया। इस मामले में नस्लीय पूर्वाग्रह के आरोप लगे थे और सुभाष ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर अपनी निराशा जताई थी।
सुभाष ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखी थी जिसमें उन्होंने कहा, "नस्लवाद और चीनी विशेषाधिकार की आलोचना करना - दो साल की सशर्त चेतावनी और मीडिया में बदनामी का अभियान। एक भारतीय आदमी की हत्या की साजिश करना - हल्की सजा और मीडिया की सहानुभूति।" यह पोस्ट सुभाष के लिए परेशानी का कारण बनी और उन्हें इसके लिए चेतावनी दी गई। हालांकि, सुभाष नायर ने इस घटना के बाद भी अपने म्यूजिक शोज और सार्वजनिक कार्यक्रमों में नस्लवाद के मामलों को उठाना जारी रखा। उन्होंने 2021 में ऑर्चर्ड टॉवर्स मर्डर मामले के बारे में एक कार्यक्रम में फिर से अपनी राय व्यक्त की, जिसके बाद उनके खिलाफ और भी केस दर्ज किए गए।
इसके अलावा, सुभाष नायर ने 2019 में अभिनेता डेनिस चियू को एक सरकारी विज्ञापन में दिखाए जाने की आलोचना की थी, जिसे लेकर उनके खिलाफ एक और केस दर्ज हुआ था।
इस वीडियो में सिंगापुर में रहने वाले चाइनीज सिंगापुरियंस के खिलाफ आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जिससे विवाद बढ़ा था। इसके अलावा, 2021 में एक और सोशल मीडिया पोस्ट में सुभाष ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर जोआना थेंग और सिटी रिवाइवल चर्च के संस्थापक जेमी वोंग के खिलाफ उठाए गए मुद्दे को उठाया। इन दोनों ने एलजीबीटीक्यू समुदाय को शैतान से जोड़ने की कोशिश की थी, और सुभाष ने कहा कि अगर यही टिप्पणी दो मलय मुसलमानों द्वारा की होती, तो उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाती।
सुभाष नायर का कहना है कि वह नस्लीय भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प रखते हैं, लेकिन उनका आरोप है कि सिंगापुर सरकार उनके इस प्रयास को दबाने के लिए उन पर दबाव डाल रही है। उनका मानना है कि उनका संघर्ष उन लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए है जो समाज में भेदभाव का शिकार हो रहे हैं।





