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'पुतिन नहीं माने तो लगेगा बैन': ट्रंप की चेतावनी से रूस पर दबाव

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि पुतिन को जल्द ही एक "डील" करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा, "हम यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर |

'पुतिन नहीं माने तो लगेगा बैन': ट्रंप की चेतावनी से रूस पर दबाव
फोटो: Putin, Trump, Russia
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने के तुरंत बाद सक्रिय कूटनीतिक पहल शुरू कर दी है। हाल ही में उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को स्पष्ट चेतावनी दी है। ट्रंप ने पुतिन से जल्द ही युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत करने को कहा है। उनका कहना है कि अगर पुतिन बातचीत से इनकार करते हैं, तो अमेरिका रूस पर नए प्रतिबंध लगा सकता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध


ट्रंप लंबे समय से दावा कर रहे हैं कि वह यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को समाप्त कर सकते हैं। यह संघर्ष अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि पुतिन को जल्द ही एक "डील" करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा, "हम यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की से बात कर रहे हैं और जल्द ही पुतिन से चर्चा करेंगे।" इसके अलावा, ट्रंप ने इस मामले में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा, "चीन का प्रभाव इस मुद्दे को सुलझाने में मदद कर सकता है।"

पुतिन पर प्रतिबंध लगाने की संभावना


जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर पुतिन बातचीत के लिए तैयार नहीं होते हैं तो क्या अमेरिका रूस पर प्रतिबंध लगाएगा, उन्होंने जवाब दिया, "ऐसा हो सकता है।" हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये प्रतिबंध किस प्रकार के होंगे। इससे पहले भी अमेरिका ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन युद्ध पर अब तक इसका निर्णायक प्रभाव नहीं पड़ा है।

पुतिन और शी जिनपिंग की वार्ता


ट्रंप के शपथ ग्रहण के एक दिन बाद, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को फोन पर बातचीत की। पुतिन ने रूस और चीन के बीच करीबी संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि ये रिश्ते साझा हितों, समानता और पारस्परिक लाभ पर आधारित हैं। इस बातचीत के समय ने संकेत दिया है कि दोनों नेता नए अमेरिकी प्रशासन के साथ अपनी रणनीति को समन्वित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उनकी बातचीत में ट्रंप का सीधा उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन इसका समय और संदर्भ यह स्पष्ट करता है कि दोनों देश अमेरिका की नई नीतियों पर नजर रख रहे हैं।

शपथ ग्रहण से पहले शी जिनपिंग ने ट्रंप से बात की थी और अमेरिका के साथ सकारात्मक संबंधों की उम्मीद जताई थी। उन्होंने आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को बढ़ाने की संभावनाओं पर बल दिया। ट्रंप का राष्ट्रपति पद संभालते ही वैश्विक स्तर पर उनके सक्रिय कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरणों का संकेत देते हैं। उनका दावा है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। अब यह देखना बाकी है कि उनकी रणनीति कितनी प्रभावी साबित होती है।

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