ट्रंप के शपथ ग्रहण से ठीक दो सप्ताह पहले, 6 जनवरी को प्रधानमंत्री ट्रूडो ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि उनका देश अमेरिका के साथ मजबूत और प्रभावी तरीके से संवाद करेगा। कनाडा के क्यूबेक स्थित मोंटेबेलो में एक विशेष कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रूडो ने कहा कि वे ट्रंप के फैसलों से पूरी तरह बेफिक्र हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि ट्रंप एक कुशल और अप्रत्याशित वार्ताकार हैं। ट्रूडो ने कहा कि ट्रंप अपनी बातचीत में अपने साझेदारों को असंतुलित करने के लिए जो भी करेंगे, वे तैयार हैं, लेकिन कनाडा अपनी स्थिति को सही तरीके से पेश करने में सक्षम है और अपने हितों की पूरी तरह से रक्षा करेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कनाडा का प्रमुख उद्देश्य अमेरिकी टैरिफ से बचना और अमेरिका के साथ सकारात्मक और संतुलित रिश्तों को बढ़ावा देना है। ट्रूडो ने सख्त लहजे में कहा कि कनाडा इन धमकियों के सामने कभी नहीं झुकेगा। अगर ट्रंप को अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना है, तो उन्हें कनाडा के प्राकृतिक संसाधनों, जैसे तेल, लकड़ी, स्टील, एल्यूमिनियम और अन्य खनिजों की जरूरत होगी, जो कनाडा में प्रचुर मात्रा में हैं। ट्रूडो का यह बयान इस बात का संकेत है कि कनाडा को इस आर्थिक संघर्ष में कुछ फायदे हो सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कनाडा और मेक्सिको पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो आगामी एक फरवरी से लागू हो सकता है। उनका कहना है कि यह कदम इस कारण जरूरी है क्योंकि इन देशों से अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं, जिससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। साथ ही, ट्रंप ने ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) को चेतावनी दी है कि यदि वे अमेरिकी डॉलर की जगह कोई नई मुद्रा या अन्य मुद्रा को अपनाते हैं, तो इन देशों पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि ये देश किसी भी प्रकार की नई मुद्रा बनाने का प्रयास न करें और डॉलर की जगह अन्य किसी मुद्रा का समर्थन न करें।
अमेरिका का यह रुख पूरी दुनिया में आर्थिक अस्थिरता पैदा कर सकता है। ब्रिक्स देशों में भारत, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, और यूएई शामिल हैं। इन देशों के बीच समन्वय का उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना है, हालांकि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिसंबर में यह स्पष्ट किया था कि ब्रिक्स देशों का कोई प्रस्ताव ब्रिक्स मुद्रा लाने का नहीं है और भारत कभी भी अमेरिकी डॉलर को हटाने के पक्ष में नहीं रहा है।
यह स्थिति वैश्विक व्यापार, मुद्रा नीति, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहरा असर डाल सकती है। ट्रंप के आर्थिक नीतियों में कोई बदलाव आते हैं या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन कनाडा और ब्रिक्स देशों सहित अन्य राष्ट्रों के साथ अमेरिका के रिश्ते अगले कुछ वर्षों में और अधिक जटिल हो सकते हैं।
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