ट्रंप ने कहा कि वर्तमान में वह पर्दे के पीछे सक्रिय रूप से फोन कॉल्स और बैठकों के ज़रिए इस तनाव को कम करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने लिखा,
"ठीक उसी तरह, हम जल्द ही ईरान और इज़राइल के बीच भी शांति स्थापित करेंगे, कई कॉल और बातचीत चल रही हैं।"
अपने पहले कार्यकाल का उदाहरण देते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने सर्बिया और कोसोवो के दशकों पुराने टकराव को युद्ध में बदलने से रोका था।
"मेरे प्रयासों से आज वहां शांति है। इसी तरह, मैंने मिस्र और इथियोपिया के बीच नील नदी के बांध को लेकर बढ़ते तनाव को भी शांत किया," उन्होंने जो बाइडेन प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ बेबुनियाद निर्णयों ने वैश्विक स्थिरता को खतरे में डाला है।
ईरान और इज़राइल में लगातार हो रहे हवाई हमलों और बढ़ती हताहतों के बीच ट्रंप का मानना है कि शांति अभी भी संभव है।ट्रंप ने कहा, मैं बहुत कुछ करता हूं और शायद ही कभी श्रेय लेता हूं, लेकिन ठीक है — लोग समझते हैं। मिडल ईस्ट को फिर से महान बनाएंगे।"
ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब इज़राइल ने बीते शुक्रवार को ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों को निशाना बनाया था। जवाब में ईरान ने 270 से अधिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से 22 इज़राइली ठिकानों पर गिरीं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है,
"अगर इज़राइल हमले रोक देता है, तो हमारी प्रतिक्रिया भी बंद हो जाएगी। लेकिन अमेरिका को इस युद्ध में साझीदार मानते हैं, और उसे इसकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी।"
हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका इन हमलों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है, लेकिन उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने अमेरिका पर कोई हमला किया तो उसे "ऐसी प्रतिक्रिया मिलेगी जैसी पहले कभी नहीं देखी गई।"
फिर भी उन्होंने दोहराया,
"हम आसानी से ईरान और इज़राइल के बीच एक समझौता करा सकते हैं और इस खूनी संघर्ष को खत्म कर सकते हैं।"





