इससे पहले शनिवार को भी मेवाणी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी नाराज़गी जाहिर की थी। उन्होंने लिखा, “विपक्षी नेता तक कह रहे हैं कि कांग्रेस के शस्त्रागार में अक्षम और संदिग्ध सदस्य भरे हैं। फिर उन्हें बाहर निकालने में क्या दिक्कत है? बी टीम और दुश्मन खेमे से जुड़े लोगों को हटाना क्यों मुश्किल हो रहा है? अगर मेरी बात नहीं मानते, तो कम से कम राहुल गांधी की सलाह तो मानिए।”
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों की गुजरात कांग्रेस जनता नहीं, भाजपा की सेवा कर रही है पर भी मेवाणी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, “यह सरासर बकवास है। अरविंद केजरीवाल चार दिन बाद गुजरात से चले जाएंगे, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता दशकों से तालुका और जिला स्तर पर भाजपा, संघ और भ्रष्ट नौकरशाही के खिलाफ जमीनी लड़ाई लड़ते आए हैं। इनमें से कई जेल भी जा चुके हैं।”
इस पूरे विवाद पर गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC) के प्रवक्ता मनीष दोशी ने संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मेवाणी को जो भी आपत्ति या सुझाव हैं, उन्हें पार्टी के आंतरिक मंच पर उठाना चाहिए। वह खुद एक वरिष्ठ नेता और कार्यकारी अध्यक्ष हैं। विसावदर और कड़ी में उपचुनाव के बीच ऐसे बयान पार्टी की एकजुटता को प्रभावित कर सकते हैं।”
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