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गुलाम नबी आजाद बोले- कश्मीरियत और इंसानियत पर हमला, गांधी जी की बात दोहराई

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पहले आतंकी हमले सुरक्षा बलों या किसी विशेष इलाके को निशाना बनाते थे, लेकिन यह हमला कश्मीरियत और इंसानियत के मूल्यों पर है।

गुलाम नबी आजाद बोले- कश्मीरियत और इंसानियत पर हमला, गांधी जी की बात दोहराई
फोटो: गुलाम नबी आजाद बोले- कश्मीरियत और इंसानियत पर हमला, गांधी जी की बात दोहराई
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के विरोध में कश्मीर घाटी में व्यापक बंद देखा गया। आम लोगों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। इस हमले के विरोध में घाटी के मुसलमानों की एकजुटता और गुस्सा साफ नज़र आया। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (DPAP) के प्रमुख गुलाम नबी आजाद ने कहा कि घाटी में ऐसा बंद उन्होंने पहली बार देखा है। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर एक मुस्लिम बहुल राज्य है। यहां की गलियों-कूचों में खुद मुसलमानों द्वारा स्वेच्छा से हड़ताल करना, दुकानें बंद रखना – यह पहली बार हो रहा है। पहले आतंकी हमले सुरक्षा बलों या किसी विशेष इलाके को निशाना बनाते थे, लेकिन यह हमला कश्मीरियत और इंसानियत के मूल्यों पर है।”


आजाद ने 1947 के बंटवारे को याद करते हुए कहा, “जब देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ, उस समय जम्मू-कश्मीर की लीडरशिप शेख अब्दुल्ला के हाथों में थी। कश्मीरी मुसलमानों और नेताओं ने मजहब के नाम पर बंटवारे का विरोध किया और भारत के साथ खड़े रहे।” उन्होंने कहा, “देश के बंटवारे के समय पूरे भारत में हिंसा फैली थी, लेकिन कश्मीर एकमात्र ऐसा क्षेत्र था जहाँ शांति बनी रही। महात्मा गांधी ने तब कहा था कि जब पूरा देश जल रहा है, तब कश्मीर एकमात्र स्थान है जहाँ से रोशनी की किरण फूट रही है।” गुलाम नबी आजाद ने आगे कहा, “अगर आज किसी आतंकी ने किसी की पहचान पूछकर उसकी हत्या की है, तो यह सीधे-सीधे कश्मीरियत और इंसानियत पर हमला है। यह हमला पाकिस्तानी समर्थित आतंकवाद की मानसिकता का नतीजा है। लेकिन इस बार कश्मीर के मुसलमानों ने चुप्पी नहीं साधी है, बल्कि स्पष्ट संदेश दिया है कि अब बहुत हो गया है।”


उन्होंने कहा, “अक्सर कहा जाता था कि मुसलमान आतंकवादियों को शरण देते हैं। लेकिन आज घाटी के मुसलमानों ने यह साबित कर दिया है कि वे इस ज़हर के खिलाफ हैं। उन्होंने एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होकर देश को संदेश दिया है कि वे भारत के संविधान और सौहार्द के साथ हैं।” टीवी चैनलों से अपील करते हुए उन्होंने कहा, “मैं मीडिया से आग्रह करता हूं कि इस संवेदनशील समय में ‘मुर्गे लड़ाने’ की कोशिश न करें। कश्मीर के मुसलमानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने हिंदू भाइयों-बहनों के साथ खड़े हैं, और यह वक्त देश को जोड़ने का है, तोड़ने का नहीं।”
 

देश में मौजूदा माहौल ही इस हमले का कारण


इस बीच, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा का बयान सामने आया है, जो राजनीतिक गलियारों में विवाद का विषय बन गया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में रॉबर्ट वाड्रा ने कहा, “मैं इस आतंकी हमले में मारे गए 28 निर्दोष लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। यह घटना अत्यंत दुखद है।” हालांकि इसके बाद उन्होंने कहा कि, “देश में मौजूदा माहौल ही इस हमले का कारण बन सकता है।” वाड्रा ने कहा, “हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहाँ सरकार लगातार हिंदुत्व की बात करती है, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय असहज और असुरक्षित महसूस कर रहा है। देश में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच एक खाई बन रही है, जो इस तरह की घटनाओं के लिए जमीन तैयार करती है।” उन्होंने आगे कहा, “अगर आतंकवादी किसी की पहचान पूछने के बाद हमला कर रहे हैं, तो यह दर्शाता है कि देश में धार्मिक पहचान को लेकर तनाव कितना गहरा गया है। यह एक गंभीर संकेत है और प्रधानमंत्री को इसका संज्ञान लेना चाहिए। अल्पसंख्यकों को यह संदेश मिलना चाहिए कि वे इस देश में सुरक्षित और बराबर नागरिक हैं।”