गिरफ्तारी से पहले उन्हें जबरन वसूली के एक अन्य मामले में जमानत मिल चुकी थी, लेकिन बाद में दिल्ली पुलिस ने मकोका के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी एक संगठित आपराधिक गिरोह की जांच के तहत की गई, जिसे कथित तौर पर गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू संचालित करता है।
हाल ही में दाखिल किए गए पूरक आरोपपत्र में चार लोगों साहिल उर्फ पोली, विजय उर्फ कालू, ज्योति प्रकाश उर्फ बाबा और नरेश बाल्यान के नाम शामिल हैं।
यह आरोपपत्र दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई द्वारा दायर किया गया था और अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाने की अनुमति दी।
बाल्यान की कानूनी टीम ने अदालत में दलील दी थी कि वह लगभग चार महीने से जेल में बंद हैं, और उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष या ठोस साक्ष्य नहीं है। वकीलों ने यह भी बताया कि न तो प्राथमिकी (FIR) में उनका नाम है और न ही कोई गवाह उन्हें अपराध में सीधे तौर पर जोड़ता है। उन्होंने यह मामला तुच्छ और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए अदालत से तुरंत राहत देने की अपील की थी।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन दलीलों का कड़ा विरोध किया। पुलिस का कहना है कि मकोका, जो कि एक विशेष अधिनियम है, उसी तरह सख्त है जैसे UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम)। इसके तहत जमानत तभी संभव है जब आरोपी के अपराध में शामिल न होने के स्पष्ट और ठोस आधार हों। पुलिस ने यह भी दावा किया कि बाल्यान की संलिप्तता निरंतर अवैध गतिविधियों में रही है, जो कि मकोका की आवश्यकताओं को पूरा करता है।





