भारत की ईवीएम: पूरी तरह ऑफलाइन
चुनाव आयोग के सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि भारतीय ईवीएम अन्य देशों में उपयोग की जाने वाली ई-वोटिंग प्रणालियों से बिल्कुल अलग हैं।
भारत की मशीनें पूर्णतः ऑफलाइन होती हैं — न इंटरनेट, न वाई-फाई, और न ही किसी वायरलेस नेटवर्क से इनका संपर्क होता है। ये मशीनें तकनीकी रूप से एक सटीक कैलकुलेटर की तरह काम करती हैं, जिसमें हैकिंग की कोई संभावना नहीं होती।
इसके अलावा, प्रत्येक वोट के साथ एक वोटर-वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) पर्ची भी निकलती है, जिसे मतदाता खुद देख सकता है। इससे वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहती है।
अब तक 5 करोड़ से अधिक VVPAT पर्चियों का सत्यापन किया जा चुका है, जिनकी गिनती उम्मीदवारों और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में की जाती है। किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में वोटों की गिनती एक दिन से कम समय में पूरी की जा सकती है।
तुलसी गबार्ड ने एक सार्वजनिक मंच से कहा,
"हमारे पास ऐसे प्रमाण हैं जो यह दर्शाते हैं कि वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम साइबर हमलों के लिए असुरक्षित रहे हैं। इससे चुनावों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इसलिए देशभर में बैलेट पेपर को लागू किया जाना चाहिए।"
गबार्ड की इस टिप्पणी के कुछ समय पहले, टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने भी ईवीएम की सुरक्षा को लेकर आगाह किया था। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को संभावित हैकिंग का शिकार बताया था और बैलेट पेपर के पक्ष में राय दी थी।





