शिवसेना विधायकों की सुरक्षा में कटौती
ताजा खबर यह है कि महाराष्ट्र पुलिस ने शिवसेना के लगभग 25 मौजूदा और पूर्व विधायकों की सुरक्षा में कटौती करने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद शिवसेना नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई है, और कुछ नेताओं का कहना है कि उन्हें देवेंद्र फडणवीस की सरकार में साइडलाइन किया जा रहा है। गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी फडणवीस के पास ही है, और बताया जा रहा है कि वे ही इस निर्णय के पीछे हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन विधायकों की सुरक्षा में कटौती की गई है, उनकी सुरक्षा के लिए 600 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की आवश्यकता थी, जिससे अन्य पुलिस कार्यों पर असर पड़ रहा था। राज्य के चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक समिति ने यह निर्णय लिया है, और इसके तहत केवल उन विधायकों को सुरक्षा दी जाएगी जो मंत्रिमंडल में शामिल हैं या जिनकी जान को खतरा है। बाकी विधायकों को एक सामान्य पुलिसकर्मी की सुरक्षा दी जाएगी, जैसा अन्य विधायकों को मिलती है।
गौरतलब है कि पहले शिवसेना विधायकों को उच्च सुरक्षा वाले फ्लैशिंग लाइट वाले वाहनों का प्रावधान था, जो केवल उच्च सुरक्षा वाले नेताओं को दिया जाता है।
यह सुरक्षा व्यवस्था तब से थी, जब जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने 40 से अधिक विधायकों के साथ बगावत कर भाजपा के साथ गठबंधन किया था। इसके बाद से शिंदे गुट को 'असली शिवसेना' का दर्जा भी मिल गया था, और उन विधायकों को कड़ी सुरक्षा प्रदान की गई थी।
बाद में, जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने और देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम बने, तब गृह विभाग की जिम्मेदारी फडणवीस के पास आई थी। इसके बाद से ही शिवसेना के कई नेता और मंत्री विभिन्न मुद्दों पर नाराजगी जता रहे हैं, जिनमें गार्जियन मिनिस्टरशिप को लेकर भी विवाद सामने आया है। हाल ही में शिवसेना उद्धव गुट के नेताओं ने फडणवीस से मुलाकात की थी, जिससे शिंदे गुट के नाराज होने की खबरें आईं।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे महाराष्ट्र की राजनीति में सत्तासंघर्ष और गठबंधन के भीतर की दरारें और गहरी हो सकती हैं।
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