प्रवेश वर्मा ने मीडिया के सामने इस कटआउट को कई बार नदी में डुबोते हुए यमुना की सफाई पर अपनी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "यमुना को साफ करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। अगर मशीनों की मदद से गाद हटाई जाए और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएं, तो यमुना को आसानी से स्वच्छ बनाया जा सकता है। जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट का निर्माण कराया, उसी तरह यमुना रिवरफ्रंट भी बनाया जा सकता है। 11 साल का समय वादा पूरा करने के लिए काफी होता है।"
यमुना प्रदूषण: जनता की गंभीर चिंता
दिल्ली में यमुना नदी का बढ़ता प्रदूषण लंबे समय से एक गंभीर समस्या है। यह न केवल स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बना है, बल्कि चुनाव प्रचार के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ विपक्षी दलों के लिए हथियार भी बन गया है। आम आदमी पार्टी द्वारा 2025 तक यमुना को साफ करने के वादे में देरी के कारण भाजपा और अन्य विपक्षी पार्टियां इसे विफलता का प्रतीक मान रही हैं।
तीखे राजनीतिक हमले
चुनावी रैलियों में नेताओं के बयान इस मुद्दे पर और गर्माहट ला रहे हैं। भाजपा के स्टार प्रचारक और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा, "मैंने अपने मंत्रियों के साथ प्रयागराज में संगम पर डुबकी लगाई। मैं केजरीवाल से पूछता हूं, क्या वह अपने मंत्रियों के साथ यमुना में स्नान कर सकते हैं?"
इस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, "अगर योगी आदित्यनाथ इतने ही आश्वस्त हैं, तो क्या वह मथुरा में यमुना का एक घूंट पानी पीने की हिम्मत करेंगे?" अखिलेश ने भाजपा पर झूठे दावे करने का आरोप लगाते हुए जनता से सचेत रहने की अपील की।
कांग्रेस भी यमुना की सफाई के मुद्दे को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है। कालकाजी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार अलका लांबा ने भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दोनों पार्टियां यमुना के नाम पर सिर्फ राजनीति कर रही हैं। उन्होंने कहा, "अगर कांग्रेस को सत्ता में आने का मौका मिला, तो यमुना की सफाई के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और जनता को वास्तविक परिणाम दिखाए जाएंगे।"
यमुना सफाई का मुद्दा अब न केवल एक पर्यावरणीय विषय रह गया है, बल्कि यह दिल्ली के चुनावी दंगल में राजनीतिक दलों के लिए जनता को आकर्षित करने का एक प्रमुख हथियार बन गया है। भाजपा और आप के बीच तीखी बहस के साथ-साथ कांग्रेस और अन्य पार्टियां भी इसे अपने एजेंडे में प्रमुखता से शामिल कर रही हैं।
दिल्ली के मतदाता इस बार यमुना सफाई के वादों को गंभीरता से देख रहे हैं। जनता न केवल प्रदूषण के स्तर में कमी चाहती है, बल्कि रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की भी अपेक्षा कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी इस मुद्दे पर जनता का भरोसा जीतने में कामयाब होती है।





