"वास्तविकता ने मुझे ठगा" – शशि थरूर
नई दिल्ली के 'फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट क्लब' (FCC) में आयोजित एक संवाद के दौरान, भारत-पाकिस्तान संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में थरूर ने कहा कि वह हमेशा से शांति समर्थक रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने उनके नजरिए को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, "बात न करना भी कोई नीति नहीं हो सकती, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनके बाद बातचीत जारी रखना मुश्किल हो जाता है।"
26/11 हमले का जिक्र करते हुए थरूर ने कहा, "जब मुंबई हमला हुआ, तब भारत और पाकिस्तान बातचीत के दौर में थे। लेकिन ऐसे हालात में बातचीत जारी रखना नामुमकिन था।" उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर की बात से सहमति जताते हुए कहा कि भारत का रुख स्वाभाविक रूप से सतर्क और सख्त होना चाहिए।
अमेरिका से भारतीय अप्रवासियों की वापसी पर जताई चिंता
थरूर ने अमेरिका से भारतीय अप्रवासियों को जबरन देश वापस भेजे जाने पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह मामला भारत के लिए बेहद संवेदनशील है और इससे स्वाभाविक रूप से आक्रोश और असंतोष पैदा हुआ है। भारत सरकार को इस मुद्दे पर वाशिंगटन के साथ उचित और कूटनीतिक तरीके से संवाद करना चाहिए।
थरूर के इस बयान को कांग्रेस के अंदर और बाहर कई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह मोदी सरकार की विदेश नीति को अप्रत्यक्ष समर्थन देता नजर आता है।
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