दरांग जिले में एक कार्यक्रम के इतर मीडिया से बातचीत में सीएम सरमा ने कहा, “कई लोगों ने अनुचित तरीके अपनाकर NRC में नाम दर्ज कराया है। इसलिए अगर संबंधित अधिकारी आश्वस्त हैं कि कोई व्यक्ति विदेशी है, तो उसे वापस भेजा जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि NRC को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि सिर्फ NRC में नाम होना यह तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं।”
सीएम ने बताया कि पिछले महीने से अब तक बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनकी नागरिकता पर संदेह है। इनमें से कई लोगों को बांग्लादेश वापस भेजा गया है, हालांकि कुछ को वहां की सरकार ने नागरिक मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद वे वापस लौट आए।
मुख्यमंत्री शर्मा ने सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक हर्ष मंदर पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “हर्ष मंदर दो वर्षों तक असम में रहे और उन्होंने कुछ युवाओं को अमेरिका और इंग्लैंड में शिक्षा के लिए भेजा। हमें अब पता चला है कि उन्होंने NRC में हेरफेर के लिए प्रेरित किया।”
उन्होंने आगे बताया कि मंगलवार की रात 19 लोगों को वापस भेजा गया, जबकि बुधवार की रात 9 और लोगों को बांग्लादेश भेजा जाएगा।





