ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि कोरोना महामारी से जुड़ी और लोगों के हितों को प्रभावित करने वाली ख़बर आयी है। इससे पहले एक ख़बर यह भी आयी थी कि सीरम इंस्टिट्यूट द्वारा निर्मित वैक्सीन ‘कोविशील्ड’ लगने वाले लोगों को हार्ट अटैक आने का ज़्यादा ख़तरा है। जबकि केंद्र सरकार और सीरम इंस्टिट्यूट ने वैक्सीन को बाज़ार में उतारने से पहले आश्वस्त किया था कि इसका लोगों के स्वास्थ्य पर कोई ग़लत प्रभाव नहीं पडेगा।
विधानसभा में पेश की जा सकती है रिपोर्ट
उम्मीद की जा रही है कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र तक रिपोर्ट पूरी तरह से तैयार की जा सकती है, और संभावित रूप से सत्र में भी पेश की जा सकता है। सरकार ने समिति का कार्यकाल छह महीने इसलिए बढ़ाया ताकि वह ठीक से जाँच कर अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौप सके। राज्य में कोविड के दौरान कुल खर्च 13,000 करोड़ रुपये था। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई आंकड़ा नहीं बताया गया, लेकिन सूत्रों ने बताया कि लगभग 1000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गयी है।
कोविड को लेकर भाजपा शासित केंद्र और राज्य सरकारें संगीन आरोपों से घिरी रही हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई रिपोर्ट्स प्रकाशित हुई थी, जिसमें कहा गया कि साल 2020-21 के दौरान कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या पाँच लाख़ से ऊपर थी। केंद्र की मोदी सरकार ने सभी रिपोर्टो को बिना आधार के बताते हुए खारिज कर दिया था। इसके साथ ही सरकार ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया कि मोदी सरकार सही तरीके से कोविड के हालात को संभाल नहीं पाई। जिसकी वज़ह से लाखों लोग मरे। कई कोविड मरीजों की मौत अस्पतालों में बेड न मिलने की वज़ह से हुई।
कुन्हा रिपोर्ट को कांग्रेस और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के लिए वरदान के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि भाजपा MUDA घोटाले पर मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश कर रही है। सिद्धारमैया इस मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की राज्यपाल की मंजूरी को चुनौती देने के लिए अदालत गये हैं। कथित घोटाला मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण या MUDA द्वारा भूमि आवंटन में अनियमितताओं से जुड़ा है। ऐसे आरोप लगाये गए हैं कि सिद्धारमैया की पत्नी बीएम पार्वती को ज़मीन का आवंटन बदले की भूमि के मूल्य से कहीं अधिक किया गया है।





