चंपई सोरेन का कहना था कि जुलाई में हेमंत के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के दौरान उन्हें अपमानित किया गया था। उन्हें उनके पद के मुताबिक सम्मान नहीं दिया जा रहा था। यही कारण था कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन को नये सिरे से शुरू करने के बारे में सोचा। ख़बर लिखे जाने तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या उनकी पार्टी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन खबरों में हेमंत सोरेन के सूत्रों की तरफ से कहा गया कि चंपई की असली तस्वीर लोगों के सामने आ गयी है। चंपई सोरेन अब बेनकाब हो चुके हैं। अगर वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ते तो पार्टी के लिए उनसे मुक़ाबला करना चुनौतीपूर्ण होता। ऐसे में झामुमो के वोट शेयर के बंटने का भी खतरा था। लेकिन अब सभी चिन्ताएं ख़त्म हो गयी है।
चंपई का मुख्यमंत्री कार्यकाल
कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार होने से कुछ घंटे पहले हेमंत सोरेन के इस्तीफा देने के बाद चंपई फरवरी में झारखंड के 12वें मुख्यमंत्री बने थे। जून में हेमंत के ज़मानत पर रिहा होने के बाद से चंपई और हेमंत के दोनों खेमों में तनाव दिखने लगा। गठबंधन विधायकों की बैठक के दौरान हेमंत को फिर से नेता यानी मुख्यमंत्री चुन लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंपई ने कहा था कि मुख्यमंत्री रहते हुए उनको मान सम्मान नहीं दिया गया था। एक बैठक में तो चंपई रो भी दिये थे। मौके पर मौजूद कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने उन्हें शांत कराया था। 3 जुलाई को चंपई ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा देते हुए हेमंत के लिए फिर से मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ़ कर दिया था।
17 अगस्त की रात को चंपई कोलकाता में भाजपा नेताओं से मिले थे। इसके अगले ही दिन यानी 18 अगस्त को चंपई अचानक से दिल्ली आ गये। जब पत्रकारों ने चंपई से दिल्ली आने का कारण पूछा तो उन्होंने सवालों को टालना शुरू कर दिया। चंपई ने संवाददाताओं से कहा, हम जहाँ हैं वहीं पर रहेंगे। 18 अगस्त की रात को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्हें "अपमानित" किया गया है और वह अपने अगले कदम पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि या तो वह किसी पार्टी में शामिल हों जायेंगे, नहीं तो अपनी खुद की पार्टी शुरू करेंगे।
कई अफवाहों को खारिज़ करते हुए, चंपई ने कहा, “शुरुआत में मैंने सोचा था कि मैं संन्यास ले लूंगा, लेकिन कोलकाता से लौटते समय, मैं अपने कई समर्थकों से मिला, जो झारखंड में विभिन्न स्थानों पर एकत्र हुए थे और मेरे उद्देश्य को समर्थन दे रहे थे। इससे मेरा मन बदल गया. अब, मैं अपनी खुद की पार्टी बनाऊंगा और अगर रास्ते में मुझे दोस्त मिलेंगे तो मैं भी उनमें शामिल हो सकता हूं।' अब साफ़ हो गया है कि वह अपनी नयी पार्टी नहीं बना रहे है।





