विपक्षी INDIA गठबंधन ने विधेयक के खिलाफ अपना विरोध स्पष्ट रूप से व्यक्त कर दिया है, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त बहस और तनातनी देखने को मिल सकती है। हालांकि, मंगलवार को सरकार के लिए एक बड़ी राहत की बात यह रही कि उसके दोनों प्रमुख सहयोगी दल जद(यू) और टीडीपी ने विधेयक का समर्थन करने की घोषणा की है। इसके पहले, सरकार ने इन दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के सुझावों को विधेयक में शामिल करने का फैसला लिया था, जिसके बाद इन दोनों दलों ने विधेयक का समर्थन करने की बात कही। इन सुझावों में वक्फ संपत्तियों से संबंधित मुद्दों पर मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
नंबर गेम और गणना
लोकसभा के संदर्भ में, जहां कुल 542 सदस्य हैं, एनडीए के पास 293 सदस्य हैं, जो उसे स्पष्ट बहुमत प्रदान करते हैं। हालांकि, यह बहुमत जद(यू) और टीडीपी के समर्थन पर आधारित है, क्योंकि भाजपा के पास खुद 240 सदस्य हैं। दूसरी ओर, विपक्षी INDIA गठबंधन के पास कुल 233 सदस्य हैं। ऐसे में एनडीए की एकजुटता ही विधेयक को लोकसभा में पारित कराने में कोई भी समस्या उत्पन्न नहीं होने देगी। विपक्षी गठबंधन ने विधेयक के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट कर दिया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच लोकसभा में तीखी बहस और संभवत: वोटिंग का सामना करना पड़ सकता है।
राज्यसभा की बात करें, तो इस सदन में 236 प्रभावी सदस्य हैं, जिनमें से एनडीए के पास कुल 122 सांसदों का समर्थन है, जिनमें 6 मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं।
राज्यसभा में विधेयक को पारित करने के लिए 119 वोटों की आवश्यकता होगी, और एनडीए को इस संख्या तक पहुंचने में कोई खास कठिनाई नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, एनडीए को असोम गण परिषद, तमिल मनीला कांग्रेस और अन्य सहयोगियों से भी समर्थन की उम्मीद है, जो उसे विधेयक के पारित होने में मदद करेंगे।
लोकसभा में एनडीए को विधेयक के पारित होने के लिए 272 वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान में भाजपा के पास 240 सदस्य हैं। इसके अलावा, जद(यू) के 12, टीडीपी के 16, एलजेपी (आरवी) के 5, रालोद के 2 और शिवसेना के 7 सदस्य एनडीए का हिस्सा हैं। इस गणना के आधार पर, एनडीए को लोकसभा में विधेयक पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल सकता है।
राज्यसभा में एनडीए के पास 236 प्रभावी सदस्य हैं, जिनमें 98 भाजपा के सदस्य हैं। इसके अलावा, जद(यू) के 4, टीडीपी के 2, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 3, शिवसेना के 1 और रालोद के 1 सदस्य शामिल हैं, जिससे एनडीए के पास कुल 125 सांसदों का समर्थन है। राज्यसभा में विधेयक को पारित कराने के लिए 119 वोटों की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, एनडीए को असोम गण परिषद, तमिल मनीला कांग्रेस और अन्य नामित सांसदों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिससे विधेयक पारित कराने में कोई समस्या नहीं होगी।
इस प्रकार, वक्फ संशोधन विधेयक के पारित होने के लिए सत्ता पक्ष को अपनी रणनीति पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि वह विपक्षी गठबंधन से बेहतर तरीके से निपट सके और विधेयक को सफलता से पारित करा सके।
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