अबूझमाड़, जिसे नक्सलियों की अघोषित राजधानी माना जाता है, माओवादी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इस ऑपरेशन ने न केवल इस क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ को कमजोर किया है, बल्कि पूरे माओवादी आंदोलन के शीर्ष नेतृत्व को गहरा आघात पहुंचाया है।
मारे गए 30 माओवादियों में से कई केंद्रीय कमेटी (CC) के सदस्य बताए जा रहे हैं, जो माओवादी संगठन की उच्च स्तरीय रणनीति का हिस्सा थे। ऑपरेशन के दौरान एक जवान घायल हो गया, हालांकि उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर है। दुर्भाग्यवश, इस मुठभेड़ में पुलिस बल का एक सहयोगी शहीद हो गया, जिसकी शहादत को पूरे देश में सराहा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बसवराजू की भूमिका माओवादी आंदोलन में वैसी ही थी जैसी अल-कायदा में ओसामा बिन लादेन की या श्रीलंका के लिट्टे संगठन में प्रभाकरण की थी। जिस तरह अमेरिका ने एक गुप्त ऑपरेशन चलाकर पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को खत्म किया था और श्रीलंका की सेना ने प्रभाकरण को समाप्त किया था, ठीक उसी तरह भारत ने इस ऑपरेशन के जरिए नक्सलवाद के शीर्ष नेतृत्व पर बड़ी चोट पहुंचाई है।
सुरक्षाबलों के लिए यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि अबूझमाड़ का इलाका नक्सलियों के लिए स्वर्ग समान है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ बना हुआ था। लेकिन इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि सुरक्षा बल नक्सलियों के हर सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच सकते हैं।
इस कार्रवाई के साथ-साथ एंटी-नक्सल ऑपरेशन अभी भी जारी है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान तब तक नहीं रुकेगा जब तक क्षेत्र को नक्सल मुक्त घोषित नहीं कर दिया जाता।





