राजग में भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) प्रमुख घटक हैं। सूत्रों के मुताबिक, 243 सीटों में से भाजपा और जदयू 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं, जिससे सहयोगियों के लिए मात्र 43 सीटें बचती हैं। लेकिन इन्हीं सीटों को लेकर खींचतान शुरू हो गई है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ 20–30 सीटों की मांग कर रही है, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 40–50 सीटों पर दावेदारी जता रही है।
इसी तरह रालोसोपा प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के समर्थक 10–15 सीटों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सहयोगी दलों की इन महत्त्वाकांक्षाओं से राजग में अंदरूनी उथल-पुथल की स्थिति बन रही है।
हालांकि, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी संजय मयूख ने स्पष्ट किया है कि सीटों का वितरण अभी तय नहीं हुआ है और उचित समय पर इसका ऐलान किया जाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजग गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और मजबूती से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।
इंडिया गठबंधन की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। इसमें राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस मुख्य साझेदार हैं, जबकि भाकपा, माकपा, भाकपा (माले) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) जैसे अन्य दल भी शामिल हैं।
पिछली बार 19 सीटों पर चुनाव लड़कर 12 जीतने वाली भाकपा (माले) इस बार कम से कम 40 सीटों की मांग कर रही है। भाकपा और माकपा भी 30–40 सीटें चाहती हैं। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने तो पहले ही संकेत दे दिया है कि उनकी पार्टी 60 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। ऐसे में इंडिया गठबंधन के भीतर भी सीटों को लेकर रस्साकशी बढ़ती दिख रही है।
राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर ने हालांकि किसी भी प्रकार के विवाद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि “इंडिया गठबंधन में विचारधारा की लड़ाई को प्राथमिकता दी जा रही है और सीट बंटवारे को लेकर उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।” उन्होंने भरोसा जताया कि “समय आने पर सब कुछ सहज और स्पष्ट हो जाएगा।”





