बाहरी-आंतरिक ताकत चुनावी प्रक्रिया को नहीं रोक सकती
9 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के दौरे के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा था कि आयोग यहां जल्द से जल्द चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। कोई भी बाहरी और आंतरिक ताकत चुनावी प्रक्रिया को पटरी से नहीं उतार सकती। जम्मू-कश्मीर के लोग देश को तोड़ने वाली ताकतों को करारा जवाब देंगे। जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने 11 अगस्त को कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि पहले परिसीमन होगा, फिर विधानसभा चुनाव और फिर उचित समय पर राज्य का दर्जा मिलेगा। सभी चीजें उसी क्रम में चल रही हैं।
मनोज सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 20 जून को श्रीनगर आए थे। तब उन्होंने जल्द चुनाव होने की घोषणा की थी। चुनाव आयोग की एक टीम ने यहां का दौरा किया है, लोगों से मुलाकात की है और जल्द चुनाव कराने की बात की है। वहीं, जम्मू-कश्मीर के अलावा इस साल महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में भी विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि चुनाव आयोग इन राज्यों के लिए भी चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश
11 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट का ये निर्देश जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसले का हिस्सा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा जितना जल्दी हो सके दिया जाए और वहां पर चुनाव कराए जायें। साथ ही जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द स्टेटहुड वापस किया जाए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला बरकरार रखा था।
दस साल पहले हुए थे विधानसभा चुनाव
जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव आखिरी बार दस साल पहले 2014 में हुए थे। इस चुनाव में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था। इसके बाद पीडीपी-भाजपा ने गठबंधन कर प्रदेश सरकार बनाई थी। जून 2018 में भाजपा के समर्थन वापस ले लेने से सरकार गिर गई थी। तब से ही जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार नहीं है।





