उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विमान रखरखाव जैसे संवेदनशील मुद्दे को नजरअंदाज किया गया है। राउत ने पूछा, “इस हादसे से पहले किस कंपनी के पास अहमदाबाद एयरपोर्ट का रखरखाव अनुबंध था? जब बोइंग डील हुई थी, तब भाजपा इसका विरोध कर रही थी। अब वही भाजपा सत्ता में है, तो विमानन सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?”
इस बीच केंद्र सरकार ने हादसे की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय बहु-विषयक समिति का गठन किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि समिति का उद्देश्य दुर्घटना के कारणों की गहन जांच करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपाय सुझाना है। यह समिति फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, विमान रखरखाव से जुड़े दस्तावेज़, एटीसी लॉग और चश्मदीदों की गवाही जैसे सभी जरूरी रिकॉर्ड की जांच करेगी। साथ ही यह समिति वर्तमान मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) की समीक्षा करेगी और आवश्यक सुधार सुझाएगी।
समिति की अध्यक्षता केंद्र सरकार के गृह सचिव करेंगे और इसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारतीय वायुसेना, और विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह टीम बचाव कार्यों की समीक्षा, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, और आपात प्रतिक्रिया प्रणाली की कार्यप्रणाली का भी मूल्यांकन करेगी। समिति को तीन महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।





