बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पड़ताल के दौरान 26 ऐसे परिवार सामने आए जिनके परिजनों की भगदड़ में मौत हुई, लेकिन उनके नाम मृतकों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं किए गए। इन परिवारों को कैश में 5-5 लाख रुपये मुआवज़ा दिया गया। कुछ के पास यूपी पुलिस द्वारा पैसे देने के वीडियो और तस्वीरें भी मौजूद हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन परिवारों से जबरन ऐसे कागज़ों पर दस्तखत कराए गए जिनमें मौत का कारण “अचानक तबीयत बिगड़ना” बताया गया, ताकि भगदड़ में मौत का ज़िक्र न हो।
जांच के दौरान 19 ऐसे परिवार भी सामने आए जिन्हें किसी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 82 मृतकों की पहचान उन परिवारों और चश्मदीदों के बयानों व सबूतों के आधार पर की गई है, जिनमें भगदड़ में मौत की पुष्टि होती है। बीबीसी ने मृतकों के परिजनों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है, पहली श्रेणी: 37 परिवार जिन्हें 25-25 लाख रुपये की आधिकारिक मदद मिली। दूसरी श्रेणी: 26 परिवार जिन्हें 5-5 लाख रुपये कैश में दिए गए। इनमें 18 उत्तर प्रदेश, 5 बिहार, 2 पश्चिम बंगाल और 1 झारखंड का परिवार शामिल है। तीसरी श्रेणी: 19 परिवार जिन्हें अब तक किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिली।
रिपोर्ट के अनुसार, ये कैश ट्रांजैक्शन विधिक प्रक्रिया के तहत नहीं हुए, और इसके कोई स्पष्ट दस्तावेजी प्रमाण नहीं हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ में चार अलग-अलग स्थानों पर भगदड़ की घटनाएं हुई थीं, जिससे कई लोगों की जानें गईं। सरकार ने अब तक केवल 37 मौतों की पुष्टि की है, जबकि बीबीसी का दावा है कि यह आंकड़ा कम करके पेश किया गया।





