SIT ने की थी मामले की जांच
मामले की शुरुआत पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से हुई थी, लेकिन बाद में इसे विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दिया गया। 16 दिसंबर 2021 को अदालत ने सज्जन कुमार के खिलाफ आरोप तय किए और प्रथम दृष्टया उन्हें दोषी पाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भीड़ ने पीड़िता के घर पर हमला किया, उसके पति और बेटे की हत्या कर दी, घर को लूट लिया और फिर आग के हवाले कर दिया। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर सज्जन कुमार को इस हत्याकांड का दोषी पाया गया।
पहले भी दो बार टल चुका है फैसला
31 जनवरी 2025 को हुई सुनवाई में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार पर फैसला टाल दिया था। इससे पहले 8 जनवरी को भी निर्णय स्थगित किया गया था। दोनों ही बार विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा की अदालत में तिहाड़ जेल में बंद सज्जन कुमार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया था। दिसंबर 2021 में सज्जन कुमार ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया था और ट्रायल का सामना करने की बात कही थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान उन्हें दोषी पाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया गया था।
जुलाई 2010 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने सज्जन कुमार, ब्रह्मानंद, पेरु, कुशल सिंह और वेद प्रकाश के खिलाफ तीन लोगों की हत्या के मामले में आरोप तय किए थे।
सुल्तानपुरी दंगों के दौरान CBI की अहम गवाह चाम कौर ने आरोप लगाया था कि सज्जन कुमार भीड़ को भड़का रहे थे। हालांकि, 13 साल बाद 20 सितंबर 2023 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में सज्जन कुमार समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
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