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पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता बनाम सुवेंदु, भबनीपुर की लड़ाई

पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता बनाम सुवेंदु, भबनीपुर की लड़ाई में मुकाबला बेहद कड़ा, टीएमसी और बीजेपी के बीच भावनात्मक और जातीय राजनीति का टकराव जारी।

पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता बनाम सुवेंदु, भबनीपुर की लड़ाई
फोटो: Mamata vs Suvendu Bhabanipur battle, TMC vs BJP West Bengal politics
पश्चिम बंगाल में ममता बनाम सुवेंदु, भबनीपुर की लड़ाई इस बार और भी तीव्र हो गई है, क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पारंपरिक विधानसभा सीट भवानीपुर इस बार चुनावी हलचल का केंद्र बनी हुई है। टीएमसी के लिए यह हमेशा सुरक्षित गढ़ रहा है, लेकिन इस बार भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी के जरिए ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि ममता बनर्जी को अपने गृह क्षेत्र में भी कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ सकता है।

ममता बनाम सुवेंदु, भबनीपुर की लड़ाई

भवानीपुर में टीएमसी ‘घर की बेटी’ (घोरेर मेये) का भावनात्मक नारा चला रही है। पार्टी के रणनीतिकार राज्य अध्यक्ष सुब्रत बक्शी की अध्यक्षता में काउंसलरों को निर्देश दे रहे हैं कि वे इस संदेश को घर-घर पहुंचाएं। और ममता बनाम सुवेंदु, भबनीपुर की लड़ाई में पार्टी विकास और भावनात्मक जुड़ाव पर जोर दे रही है। पूरे क्षेत्र में ममता बनर्जी के लाइफ-साइज कटआउट रखकर फोटो कॉर्नर बनाए गए हैं, जहां लोग उनके साथ तस्वीर खिंचवा सकते हैं।

भाजपा की रणनीति: जातीय गणित और प्रतीकात्मक मुद्दे 

भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जिसमें बंगाली भद्रलोक, मारवाड़ी-गुजराती व्यापारी, सिख-जैन परिवार और मुस्लिम आबादी शामिल हैं। भाजपा ने यहां समुदाय-समुदाय और बूथ-स्तर पर व्यापक मैपिंग की है। स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, कायस्थ 26.2%, मुस्लिम 24.5%, पूर्वी भारतीय प्रवासी 14.9%, मारवाड़ी 10.4% और ब्राह्मण 7.6% हैं। और पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी बनाम भाजपा की लड़ाई में भाजपा इस बार राम नवमी और ‘राम राज्य’ जैसे प्रतीकात्मक मुद्दों के जरिए बहुसंख्यक हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

वोटर लिस्ट संशोधन और नई चुनौतियां 

भवानीपुर से लगभग 47,000 नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जो 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी की 58,832 वोटों की बढ़त से करीब 11,000 कम हैं। जांच के अधीन 14,000 नामों में 56% से अधिक मुस्लिम मतदाता शामिल हैं। टीएमसी इसे अपनी पारंपरिक वोट बैंक और अल्पसंख्यक मतों पर असर मान रही है। पार्टी नेता फिरहाद हाकिम और सुब्रत बक्शी व्यक्तिगत तौर पर निगरानी कर रहे हैं।

पिछले चुनावी रुझान

लोकसभा चुनावों में भाजपा ने भवानीपुर में धीरे-धीरे अपनी पैठ बनाई है। 2014 में उसने ममता के अपने वॉर्ड 73 में जीत हासिल की थी। 2024 लोकसभा चुनाव में टीएमसी की बढ़त सिर्फ 8,297 वोट तक रह गई, जबकि 2021 उपचुनाव में यह 58,832 थी। आठ वॉर्डों में से पांच में भाजपा आगे रही, टीएमसी केवल तीन में। यह आंकड़ा दिखाता है कि भवानीपुर अब अजेय सीट नहीं रही।

29 अप्रैल को होने वाले इस विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का मैदान नहीं है, बल्कि टीएमसी की भावनात्मक राजनीति और भाजपा की जातीय-सामाजिक इंजीनियरिंग के बीच विचारधारा की लड़ाई भी देखने को मिलेगी।

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