कामराज के नाम पर ब्रेकफास्ट स्कीम का नामकरण
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य की ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलकर इसे पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. कामराज के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। यह एक साधारण नाम परिवर्तन प्रतीत होता है, लेकिन इसके पीछे गहरे राजनीतिक तत्त्व छिपे हुए हैं। कामराज के नाम को योजना से जोड़कर विजय ने एक ओर DMK पर हमला किया है, वहीं दूसरी ओर नादर समुदाय में अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास भी किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों को विजय के इस कदम में भाजपा के लिए नए राजनीतिक अवसर नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि कामराज को तमिलनाडु की राजनीति से बाहर निकालकर व्यापक OBC प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसी संदर्भ में, भाजपा समर्थक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार की किसी योजना का नाम कामराज के नाम पर रखा जाए।
योजना का विस्तार और राजनीतिक संदेश
तमिलनाडु सरकार ने 22 सितंबर को आदेश जारी कर ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम 'पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम' रखा। यह योजना 2022 में DMK सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी, जिसका लाभ पहले सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को दिया जाता था। विजय के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद योजना का दायरा बढ़ाया गया, जिसमें कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भी शामिल किया गया।
इस संदर्भ में कामराज का नाम जोड़ा जाना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक रणनीति मानी जा रही है। कामराज ने 1956 में मद्रास स्टेट में स्कूल मील कार्यक्रम की शुरुआत की थी, जिसके तहत गरीब बच्चों को मुफ्त भोजन प्रदान किया जाता था। उनकी पहचान नादर समुदाय के प्रमुख नेताओं में भी रही है।
नादर समुदाय की राजनीतिक अहमियत
जानकारों के अनुसार, नादर समुदाय का दक्षिणी तमिलनाडु की राजनीति में खासा महत्व है। इस समुदाय की उपस्थिति कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन, तेनकासी और विरुधुनगर जैसे जिलों में अच्छी तरह से देखी जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य के कुल मतदाताओं में नादर समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 6 से 8 प्रतिशत हो सकती है।
विजय खुद ईसाई हैं और ईसाई नादर समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कामराज का नाम इस समुदाय के हिंदू हिस्से तक पहुंचने के लिए एक पुल का कार्य कर सकता है। इसलिए ब्रेकफास्ट स्कीम का नाम बदलना केवल सम्मान देने का कदम नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
विजय के लिए कामराज का महत्व
विजय ने अपनी पार्टी की स्थापना के बाद से ही कामराज को स्वच्छ शासन और शिक्षा को बढ़ावा देने वाले आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपनी पार्टी के राजनीतिक छवि में तमिलनाडु और भारत के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास से जुड़ी प्रमुख हस्तियों को शामिल किया है।
कामराज को सामने लाकर विजय यह संदेश देना चाह रहे हैं कि तमिलनाडु की राजनीतिक विरासत केवल द्रविड़ आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि कल्याणकारी राजनीति की एक और परंपरा भी मौजूद है। इस संदर्भ में, रविंद्रन दुरईसामी का कहना है कि विजय 'एंटी-ड्रविड़ियन' राजनीतिक लाइन पर कार्य कर रहे हैं, जिससे DMK के खिलाफ एक नई राजनीतिक जमीन तैयार की जा सके।





