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दिल्ली में 6,000 जवान, मणिपुर में नहीं: TMC का केंद्र पर सवाल

मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान सुरक्षा बलों की कमी पर उठे सवाल

दिल्ली में 6,000 जवान, मणिपुर में नहीं: TMC का केंद्र पर सवाल
फोटो: TMC Questions Center on Deployment of 6,000 Troops in Delhi, None in Manipur

दिल्ली में सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे छात्र-युवा आंदोलनों को नियंत्रित करने के लिए नई दिल्ली में तैनात की गई भारी पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।


TMC के प्रवक्ता एवं विधायक कुणाल घोष ने कहा, 'यदि केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों से जातीय संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर में समय पर पर्याप्त सुरक्षाबल भेजे होते, तो वहां की स्थिति काफी बेहतर होती।'


राजनाथ सिंह का बयान और TMC की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि 'INDIA' नामक विपक्षी गठबंधन युवाओं की ऊर्जा का दुरुपयोग कर रहा है। उन्होंने इसे बांग्लादेश जैसे तख्तापलट के प्रयासों से जोड़ा।


इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कुणाल घोष ने कहा, 'हम अराजकता का समर्थन नहीं करते, लेकिन जब युवा किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर सवाल उठाते हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन्हें समझाए, न कि पुलिस बल के माध्यम से दबाए।'


CJP का प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली में SIR विवाद और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के खिलाफ 'लहरा दो तिरंगा' मार्च का आयोजन किया। इस प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की।


प्रदर्शन से पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और छात्र नेता नेहा बोरा सहित कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। हालांकि, देर रात नेहा बोरा को रिहा कर दिया गया जबकि दीपके को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।


मणिपुर में जातीय संघर्ष का संदर्भ

कुणाल घोष का बयान मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि में आया है, जहां मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा हो रही है।


आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, मणिपुर में अब तक 306 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, हाल ही में कुकी और नागा जनजातियों के बीच भी संघर्ष में कई लोग मारे गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार दिल्ली में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए जितने संसाधन लगा रही है, उतना मणिपुर की सुरक्षा को बहाल करने में नहीं किया जा रहा है।