दिल्ली में बीजेपी का विरोध प्रदर्शन
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित महारैली पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने जानबूझकर सिख विरोधी दंगों की बरसी पर यह रैली आयोजित की, जबकि इसके लिए कोई अन्य उपयुक्त दिन चुना जा सकता था। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में हरिनगर से तिलक नगर तक एक मार्च भी निकाला गया, जिसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री मजिंदर सिंह सिरसा और वरिष्ठ वकील एचएस फूलका शामिल हुए।
भाजपा के नेताओं ने इस रैली की समय-सीमा पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे सिख समुदाय के लिए अपमानजनक बताया।
सिख संगठनों की प्रतिक्रिया
सिख संगठनों ने भी 1 नवंबर की तारीख पर आपत्ति जताई है। एचएस फूलका ने कहा, "यह दिन न केवल सिखों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए काला दिवस है। कांग्रेस को इस दिन अपने सिर को शर्म से झुका लेना चाहिए। क्या यही दिन महारैली के लिए उपयुक्त था?" 1984 दंगा पीड़ित वेलफेयर सोसाइटी ने भी इस रैली की समय-सीमा पर सवाल उठाए हैं।
इस संगठन के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मिलकर इस दिन को शोक दिवस के रूप में मनाने की मांग की। उन्होंने घर, रोजगार और पुनर्वास की मांग भी दोहराई।
पीड़ित परिवारों का दुख
सोसाइटी के अध्यक्ष सुरजीत सिंह और महिला विंग की अध्यक्ष बीबी गुरदीप कौर ने राज्यपाल से मुलाकात की और बताया कि उनके परिवार के आठ सदस्य इन दंगों में मारे गए थे। इसी तरह, राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने भी पीड़ित परिवारों के साथ मुलाकात की और साझा किया कि उनके परिवार के चार लोग दंगों में जान गंवा चुके हैं।
भाजपा का देशव्यापी प्रदर्शन
भाजपा ने देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन और पदयात्राएं आयोजित कीं। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य शीर्ष नेताओं ने सड़कों पर उतरकर कांग्रेस के खिलाफ अपने विचार व्यक्त किए। नितिन नवीन ने हरियाणा के रोहतक में और महायुति के सहयोगियों ने मुंबई में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' की पदयात्रा का आयोजन किया।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर रैली आयोजित करके काले इतिहास को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस रैली को नकारे गए दलों का ड्रामा बताते हुए इसे कांग्रेस के राजनीतिक पतन की अंतिम कड़ी करार दिया।





