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राष्ट्रीय • दिल्ली

शशि थरूर का किरेन रिजिजू को जवाब: भारत न बांग्लादेश न फ्रांस

थरूर ने फ्री और फेयर चुनाव की मांग की और सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

शशि थरूर का किरेन रिजिजू को जवाब: भारत न बांग्लादेश न फ्रांस
फोटो: Shashi Tharoor Responds to Kiren Rijiju: India is Neither Bangladesh Nor France

केंद्रीय मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उन्होंने कहा कि इन तुलनाओं का कोई औचित्य नहीं है। थरूर ने यह भी कहा कि वे फ्रांस में हुई किसी भी हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं का समर्थन नहीं करेंगे, और उनका मानना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना ही उचित है।


थरूर ने आगे बताया कि वे स्वयं ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का हिस्सा रहे हैं और विपक्ष भी आमतौर पर इसका समर्थन करता है।


फ्री और फेयर चुनाव की मांग

बड़े मुद्दों पर बात करते हुए थरूर ने कहा कि 'रिजीम चेंज' जैसे शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी मांग फ्री और फेयर चुनावों की है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं, जो एक गंभीर और गैर-कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है।


थरूर ने इसे एक संवैधानिक मुद्दा बताते हुए कहा कि यह किसी सरकार को गिराने का प्रयास नहीं है, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करना है।


लोकतंत्र का संरक्षण नागरिकों का दायित्व

एएनआई से बातचीत में थरूर ने कहा, "लोकतंत्र किसी एक की देन नहीं है। हम, आम नागरिक इसके कस्टोडियन हैं।" उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हर भारतीय नागरिक को लोकतंत्र की रक्षा करने का अधिकार है।


थरूर ने चुनाव आयोग से अपील की कि वे अपने कार्य को भारत के लोकतांत्रिक संविधान के अनुरूप सही तरीके से करें। उन्होंने संस्थानों की वैधता को चुनौती नहीं दी, बल्कि उनके काम करने के तरीके पर सवाल उठाया।


सरकार पर विरोध की आवाजें दबाने का आरोप

इससे पहले थरूर ने अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जवाबदेही से मुंह मोड़ लिया है और विरोध की आवाजों को दबाने के लिए हिरासत का सहारा ले रही है।


उत्तराखंड में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में न्याय की मांग कर रहे उनके माता-पिता ने इंडिया गेट के पास प्रदर्शन किया था, जहां उन्हें बृहस्पतिवार तड़के हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।