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एस. जयशंकर: भारत ने वैश्विक संकटों में लचीलापन दिखाया

एस. जयशंकर: भारत ने वैश्विक संकटों में लचीलापन दिखाया, वैश्विक झटकों के बीच देश ने मजबूती और स्थिरता के साथ चुनौतियों का सफल सामना किया।

एस. जयशंकर: भारत ने वैश्विक संकटों में लचीलापन दिखाया
फोटो: S Jaishankar India resilience, India global shocks resilience
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत ने वैश्विक संकटों में लचीलापन दिखाया और  हाल के वर्षों में दुनिया में आए कई बड़े वैश्विक झटकों के बावजूद अपनी लचीली आर्थिक और सामरिक क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है। उन्होंने आईआईएम रायपुर के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में कहा कि भारत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मोर्चों पर इन चुनौतियों से मजबूती से निपटने का काम किया है।

जयशंकर ने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और दुनिया के शक्ति संतुलन में नए परिवर्तनों के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आजकल लगभग हर चीज का लीवरेज लिया जा रहा है या फिर उसे हथियार के रूप में बदल दिया जा रहा है। ऐसे समय में भारत ने वैश्विक संकटों में लचीलापन दिखाया है और उसकी लचीलता और स्थिरता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

वैश्विक संकटों में भारत का लचीलापन

विदेश मंत्री ने भारत की आत्मनिर्भरता और मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, सैन्य क्षमता, कनेक्टिविटी और संसाधनों के क्षेत्र में लगातार विकास किया है, जिससे देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिली है। उन्होंने समाज में व्याप्त सकारात्मक दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया, जिसे दुनिया के अन्य हिस्सों में कम ही देखा जाता है, और साथ ही उन्होंने ईरान युद्ध का भारत पर प्रभाव भी रेखांकित किया।

जयशंकर ने कहा कि पिछले दस साल भारत के लिए काफी बेहतर रहे हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दस साल और उसके बाद के वर्षों में भी यह सकारात्मक रुझान जारी रहेगा।

टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं में भारत

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब दुनिया की टॉप फाइव अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हाल के वैश्विक झटकों के बावजूद हासिल की गई, जिससे भारत की स्थिरता और लचीलापन स्पष्ट होता है।

उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर भी जोर दिया, जिनमें समावेशी विकास, प्रतिनिधित्वपूर्ण राजनीति, निर्णायक नेतृत्व और डिजिटल क्रांति शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करना और उन्हें सुरक्षित रखना भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद जरूरी है।

वैश्विक संकट और भारत की भूमिका

हाल के समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के प्रभाव से जूझ रही है। तेल बाजार अस्थिर हो गया है, अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रभावित हुई है और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ गए हैं। ऐसे समय में भारत की स्थिरता और लचीलेपन दुनिया के लिए एक प्रेरणा बन गई है।

जयशंकर ने युवाओं से अपील की कि वे बदलती वैश्विक परिस्थितियों को समझें और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय योगदान दें।

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