Supreme Court ने क्यों बढ़ाई जद्दोजहद
पिछले कई वर्षो से दिल्ली और आसपास का क्षेत्र दिवाली के बाद प्रदूषण की समस्या से जूझता आ रहा है। सरकारों और पर्यावरणविदों की चिंताएँ बढ़ती वायु प्रदूषण स्तरों के कारण उठती रहीं।
वहीं पटाखा उद्योग और व्यापारियों की मांग थी कि यदि हरी पटाखे उपयोग की अनुमति मिले तो उनके व्यवसाय और लाखों लोगों की आजीविका पर असर कम होगा।
इस तकरार और याचिकाओं के मद्देनज़र Supreme Court ने इस वर्ष “संयमित और सीमित” तौर पर पटाखों की वापसी को मंज़ूरी दी।
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यह केवल एक अस्थायी आयोजन के रूप में हो, ताकि त्योहार की भावना को बचाए रखते हुए पर्यावरण की रक्षा भी हो सके।
इसलिए, यह निर्णय न सिर्फ जश्न मनाने वालों के लिए राहत है, बल्कि संकल्पना है कि नियमों का नियंत्रण हो — न कि पूरी तरह से प्रतिबंध।
Supreme Court की शर्तें — नियंत्रण और निगरानी
- समय और अवधि की सीमाएं
अदालत ने स्पष्ट किया कि पटाखों को 18 से 21 अक्टूबर 2025 तक ही प्रयोग की अनुमति होगी। दैनिक उपयोग के लिए दो समय‑खिड़कियाँ निर्धारित की गई हैं: सुबह 6 बजे से 7 बजे तथा शाम 8 बजे से 10 बजे। - निगरानी एवं शर्तें
केवल NEERI‑स्वीकृत हरी पटाखों की ही बिक्री और उपयोग की अनुमति होगी। पटाखों पर QR कोड अनिवार्य होगा और उन्हें पंजीकृत विक्रेताओं के माध्यम से ही बेचना होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और संबंधित राज्य बोर्डों को वायु गुणवत्ता पर निगरानी करनी होगी और अदालत को रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
गैर-निर्धारित स्थानों पर पटाखों की बिक्री या अवैध रूप से बाहर से लाए गए पटाखों के उपयोग पर सख्त कार्रवाई होगी — लाइसेंस निलंबन या जब्ती की चेतावनी। इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Supreme Court द्वारा दी गई छूट बेहिसाब और अनियंत्रित न हो। इस तरह नियंत्रण बरकरार रहते हुए त्योहार भी मनाया जाए।
Supreme Court की फैसले से जुड़े लाभ‑हानि का समीकरण लाभ
- व्यापार और उद्योग को राहत: पटाखा व्यवसायी और कारीगर लंबे समय से बंदी से प्रभावित थे। इस फैसले से उन्हें जानने और बेचने का अवसर मिलेगा।
- त्योहार का आनंद: लोगों को दिवाली पर पटाखों का आनंद सीमित रूप से लेने की अनुमति मिली है।
- ज़िम्मेदार उपयोग को बढ़ावा: NEERI-सर्टिफाइड हरी पटाखे और QR कोड जैसे तंत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि उपयोग कम हानिपूर्ण हो।
हानि / संभावित चुनौतियाँ
- वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी: विशेषज्ञों का मानना है कि हरी पटाखे भी कुछ हानिकारक उत्सर्जन छोड़ते हैं, और उन पर नियंत्रण करना चुनौतीपूर्ण होगा।
- प्रवर्तन की कमी: यदि निगरानी कमजोर हुई, तो प्रतिबंधित पटाखों का अवैध उपयोग और बिक्री बढ़ सकती है।
- क्षेत्रीय असमानता: NCR के बाहर या सीमावर्ती इलाकों में नियमों की लागू करना कठिन हो सकता है।
- स्वास्थ्य प्रभाव: वायु प्रदूषण पहले से ही गंभीर समस्या है, और इस कटौती के बावजूद, संवेदनशील वर्ग (बच्चे, वृद्ध) प्रभावित हो सकते हैं।





